मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का दायरा बढ़ाने की घोषणा की है. अब तक इस योजना के तहत राज्य के बाहर स्थित प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा कराई जाती थी, लेकिन जल्द ही मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थानों को भी इसमें शामिल किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे श्रद्धालुओं को प्रदेश की समृद्ध धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा.
समीक्षा बैठक में दिए महत्वपूर्ण निर्देश
संस्कृति विभाग की योजनाओं और गतिविधियों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि राज्य के बाहर के प्रमुख मंदिरों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के दोनों ज्योतिर्लिंग, जागृत एवं मंशापूर्ण शक्तिपीठों और अन्य प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों को भी मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का हिस्सा बनाया जाए. सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को धार्मिक यात्राओं का लाभ उपलब्ध कराना है.
अनूपपुर के वरिष्ठ नागरिकों के लिए तीर्थ यात्रा
योजना के अंतर्गत अनूपपुर जिले के 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए 31 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक अयोध्या और वाराणसी की तीर्थ यात्रा आयोजित की जाएगी. इस यात्रा में शामिल होने के इच्छुक पात्र नागरिक 17 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन पत्र धर्मस्व विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं. यदि निर्धारित संख्या से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं तो पात्र आवेदकों का चयन कम्प्यूटरीकृत लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा.
सहायक को साथ ले जाने की सुविधा
सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान भी किए हैं. 65 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति यदि अकेले यात्रा के लिए आवेदन करता है तो वह अपने साथ एक सहायक ले जा सकेगा. वहीं तीन से पांच वरिष्ठ नागरिकों के ऐसे समूह, जिनकी आयु 65 वर्ष से अधिक हो, उन्हें भी एक सहायक साथ रखने की अनुमति होगी. हालांकि यदि पति-पत्नी एक साथ यात्रा करेंगे तो उनके साथ अलग से सहायक ले जाने की अनुमति नहीं मिलेगी.
सांस्कृतिक आयोजनों और विरासत संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि आने वाले महीनों में प्रदेश में कई बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन होंगे. उन्होंने संस्कृति विभाग को निर्देश दिए कि सभी समाजों की आस्था और परंपराओं को जोड़ते हुए व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएं. साथ ही आल्हा-ऊदल की स्मृति में विशेष आयोजन, श्रावण महोत्सव और भुजरिया पर्व को भी भव्य रूप से मनाने की बात कही. नागपंचमी के अवसर पर सर्प संरक्षण और जैव विविधता बचाने का संदेश जन-जन तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की कला, संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी पहचान हैं और इनके संरक्षण व प्रचार के लिए सरकार लगातार प्रभावी प्रयास कर रही है.









