डिंडोरी /खबर डिजिटल/शैलेश नामदेव/ MP News: डिंडौरी जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं इन दिनों अपनी अंतिम साँसे गिन रहा हैं। अस्पताल की आउटसोर्स सेंट्रल लैब में पिछले करीब 15 दिनों से खून और पेशाब जैसी सामान्य स्वास्थ्य जांचें पूरी तरह से ठप पड़ी हुई हैं। लैब में जांच की सुविधा बाधित होने से इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि मरीजों के सैंपल प्रतिदिन बस के माध्यम से 150 किलोमीटर दूरी जांच के लिए जबलपुर भेजे जा रहे हैं।
रिपोर्ट के लिए दो दिन का इंतजार, इलाज में देरी
खबर डिजिटल की पड़ताला में जिला अस्पताल में जांच की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण रोजाना बड़ी संख्या में मरीजों के सैंपल इकट्ठा कर बस के जरिए जबलपुर भेजे जा रहे हैं। इससे जहां पहले कुछ ही घंटों में रिपोर्ट मिल जाया करती थी, वहीं अब रिपोर्ट मिलने में एक से दो दिन तक का समय लग रहा है। जांच रिपोर्ट में हो रही इस देरी के कारण मरीजों का इलाज भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
जिला अस्पताल के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के 7 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों—विक्रमपुर, शहपुरा, मेहंदवानी, समनापुर, अमरपुर, बजाग और करंजिया में भी आउटसोर्स एजेंसी द्वारा ही पैथोलॉजी सेवाएं चलाई जा रही हैं। वहां भी व्यवस्थाएं ठप होने से दूर-दराज के ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है।
सिकल सेल किट की भी कमी, 56 हजार जांच का लक्ष्य खतरे में
जिले में सिकल सेल एनीमिया की रोकथाम और पहचान के लिए चलाई जा रही जांच प्रक्रिया पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सिकल सेल की पुष्टि के लिए आवश्यक 'एचबी वेरिएंट किट' की भारी कमी बताई जा रही है। गौरतलब है कि जिले में लगभग 3,300 मरीज सिकल सेल से प्रभावित हैं, जबकि प्रतिवर्ष 56 हजार लोगों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किट की अनुपलब्धता के कारण यह महत्वपूर्ण अभियान भी अधर में लटक गया है।
मरीज निजी लैब की ओर रुख करने को मजबूर
सरकारी अस्पताल में जांच सेवाएं ठप होने के कारण गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों को मजबूरन निजी पैथोलॉजी सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है। निजी लैब संचालक मरीजों से मनमाने दाम वसूल रहे हैं।
इस स्थिति पर विरोध जताते हुए कांग्रेस सेवा दल के जिलाध्यक्ष अतुल जैन ने आरोप लगाया है कि "अस्पताल प्रबंधन की नाकामी के कारण मरीजों की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।" उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
संबंधित एजेंसी को नोटिस जारी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज पांडे ने माना कि, जिला अस्पताल में खून-पेशाब की जांच प्रभावित हुई है और सिकल सेल किट की कमी बनी हुई है। उन्होंने बताया कि व्यवस्था को संचालित करने वाली संबंधित एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है तथा जल्द से जल्द सभी जांच सुविधाएं बहाल करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।"







