भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री से जुड़े कार्यों के विरोध में पटवारियों की प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई है। मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल की सख्ती और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पटवारी संघ के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के बाद यह घटनाक्रम सामने आया। अब प्रदेशभर के पटवारी 12 अक्टूबर 2026, सोमवार से अपने-अपने कार्यस्थलों पर पहुंचकर नियमित कामकाज संभालेंगे।
हड़ताल से किसानों के काम हो रहे थे प्रभावित
स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री से जुड़े कामों के विरोध में पटवारी संघ ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया था। पटवारियों के आंदोलन के कारण राजस्व से संबंधित कामकाज और किसानों से जुड़े कई कार्य प्रभावित होने लगे थे। इसके बाद प्रशासन ने आंदोलन को लेकर सख्त रुख अपनाया। जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में तीन दर्जन से अधिक पटवारियों को बर्खास्त किया गया, जबकि करीब एक सैकड़ा से ज्यादा पटवारियों को निलंबित किए जाने की कार्रवाई हुई। इनमें रीवा जिले में 15 और सिंगरौली जिले में 10 पटवारियों के निलंबन की जानकारी सामने आई है।
मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को दी थी सख्त चेतावनी
पटवारियों की हड़ताल और कामकाज प्रभावित होने के मामले में मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को सख्त निर्देश दिए थे। उन्होंने स्पष्ट किया था कि यदि पटवारी समय पर काम पर नहीं लौटते और सरकारी कामकाज प्रभावित होता है, तो संबंधित कलेक्टरों को भोपाल बुलाया जाएगा। मुख्य सचिव की इस चेतावनी के बाद जिलों में प्रशासनिक सक्रियता बढ़ी और पटवारियों की हड़ताल समाप्त कराने के प्रयास तेज हुए। इस घटनाक्रम के बाद पटवारियों के काम पर लौटने का रास्ता साफ हुआ।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद बनी सहमति
पटवारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर अपनी मांगें रखी थीं। जानकारी के अनुसार, बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने पटवारियों की कुछ मांगों पर सहमति दी। इसके बाद संघ ने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया।
12 अक्टूबर से नियमित कामकाज संभालेंगे पटवारी
हड़ताल समाप्त होने के बाद प्रदेशभर के पटवारी सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 से अपने-अपने जिलों में निर्धारित कार्यस्थलों पर पहुंचकर राजस्व संबंधी और अन्य नियमित कामकाज करेंगे। इससे लंबे समय से प्रभावित हो रहे किसानों और आम नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है। अब प्रशासन के सामने राजस्व कार्यों को सामान्य स्थिति में लाने और लंबित मामलों का निपटारा तेजी से कराने की चुनौती होगी। वहीं, पटवारी संघ की मांगों पर आगे होने वाली कार्रवाई भी महत्वपूर्ण रहेगी।









