जबलपुर। मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े मामले की मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस विनय सराफ और जस्टिस विवेक अग्रवाल की विशेष खंडपीठ के सामने राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखा। सरकार ने कहा कि प्रमोशन पिछड़ेपन और सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों के आधार पर दिए जा रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाए पूरा डेटा
सुनवाई के दौरान सरकार ने बताया कि पहले कोर्ट के निर्देश पर संबंधित डेटा सीलबंद लिफाफे में पेश किया गया था। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई आदेश रिकॉर्ड में नहीं है, जिसमें डेटा साझा करने से रोका गया हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सरकारी गोपनीय जानकारी नहीं है, इसलिए इसे याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा, पुराने आदेशों का पालन क्यों नहीं हुआ
कोर्ट ने रिकॉर्ड की समीक्षा में पाया कि 16 अक्टूबर 2025 को सरकार को स्टडी और सर्वे से जुड़ा पूरा डेटा पेश करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद केवल कुछ दस्तावेज जमा किए गए, जबकि बाकी रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। इस पर हाईकोर्ट ने माना कि उसके पहले दिए गए आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
17 जुलाई तक आपत्तियां, 21 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं को पूरा डेटा नहीं मिलेगा तो वे उस पर आपत्ति कैसे दर्ज करेंगे। इसलिए सरकार को निर्देश दिया गया है कि रूल-5 के तहत तैयार सभी स्टडी और सर्वे का डेटा प्रतिवादियों को उपलब्ध कराया जाए। डेटा मिलने के बाद संबंधित पक्ष 17 जुलाई तक अपनी आपत्तियां दाखिल कर सकेंगे। मामले की अगली सुनवाई अब 21 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे होगी।
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