भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी जमीन की रजिस्ट्री कर सकेंगे। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लाखों परिवारों को कम समय में संपत्ति का मालिकाना हक मिलेगा और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल हो जाएगी।
तहसीलदारों को मिले रजिस्ट्री के अधिकार
प्रदेश सरकार की नई व्यवस्था के तहत तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार को उप पंजीयक के अधिकार दिए गए हैं। इसके बाद ये अधिकारी भी जमीन की रजिस्ट्री कर सकेंगे। इससे लोगों को केवल उप पंजीयक कार्यालय पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रजिस्ट्री का काम तेजी से पूरा हो सकेगा।
पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग की ओर से जारी अधिसूचना लागू होने के बाद संबंधित अधिकारी अपने क्षेत्र में रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य लोगों को सरकारी सेवाएं उनके नजदीक उपलब्ध कराना और लंबित मामलों का जल्द निपटारा करना है।
स्वामित्व योजना के तहत मिलेगा लाभ
यह फैसला राज्य सरकार की "स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026" के तहत लागू किया गया है। 2 जून को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इस योजना को मंजूरी दी गई थी। सरकार ने इस योजना के तहत ग्रामीण आबादी की भूमि की रजिस्ट्री पर स्टांप शुल्क और पंजीयन शुल्क पूरी तरह माफ करने का निर्णय लिया था।
इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को उनकी आबादी की भूमि का वैध मालिकाना हक दिलाना और संपत्ति के दस्तावेज तैयार करना है।
48 लाख से अधिक परिवारों को मिलेगा फायदा
सरकार के अनुसार प्रदेश में आबादी की भूमि पर रहने वाले 48 लाख से अधिक परिवारों को इस योजना का लाभ मिलेगा। पहले रजिस्ट्री की प्रक्रिया में समय अधिक लगता था, लेकिन अब अतिरिक्त अधिकारियों को अधिकार मिलने से आवेदन का निपटारा तेजी से किया जा सकेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अब रजिस्ट्री के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया भी सरल होगी और लोगों का समय बचेगा।
पंचायत उपकर का खर्च सरकार उठाएगी
कैबिनेट ने यह भी फैसला लिया है कि पंचायत उपकर की राशि अब राज्य सरकार स्वयं पंचायतों को उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही पंचायत उपकर माफ करने को भी मंजूरी दी गई है। इस निर्णय से राज्य सरकार पर लगभग 3,800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा, लेकिन इससे ग्रामीण परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी और संपत्ति का पंजीयन कम खर्च में हो सकेगा।
अधिसूचना में क्या कहा गया है
जारी अधिसूचना के अनुसार स्वामित्व योजना के तहत जिन ग्रामीणों को आबादी की भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री कराई जानी है, उनकी रजिस्ट्री अब केवल उप पंजीयक कार्यालय में ही नहीं होगी। तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी यह प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
प्रदेश में पहले से कार्यरत 235 उप पंजीयकों के अलावा राजस्व न्यायालय का कार्य देखने वाले इन अधिकारियों को भी रजिस्ट्री का अधिकार दिया गया है। इससे रजिस्ट्री की क्षमता बढ़ेगी और लोगों को समय पर सेवाएं मिल सकेंगी।
ये खबर भी पढ़ें..









