मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद राजनीतिक माहौल अचानक गर्म हो गया है. चुनाव आयोग के अनुसार 1 जून 2026 से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि 18 जून को मतदान और मतगणना एक ही दिन कराई जाएगी. हालांकि यह चुनाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा उस एक सीट को लेकर हो रही है जिसे बचाना कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है.
दो सीटों पर भाजपा की स्थिति मजबूत
इन तीन सीटों में से दो पर भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, जबकि तीसरी सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है. भाजपा अपने संख्या बल को लेकर काफी सहज नजर आ रही है, लेकिन कांग्रेस के भीतर रणनीति और आंकड़ों को लेकर लगातार बैठकों का दौर चल रहा है. पार्टी किसी भी तरह की राजनीतिक चूक से बचना चाहती है.
इस चुनाव को लेकर हलचल तेज
इस चुनाव को लेकर हलचल इसलिए भी ज्यादा बढ़ गई है क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh ने संकेत दिए हैं कि वह दोबारा राज्यसभा जाने के इच्छुक नहीं हैं. उनके इस रुख के बाद कांग्रेस में नए चेहरों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ युवा चेहरे भी अब दावेदारी में सामने आने लगे हैं. भोपाल से लेकर दिल्ली तक नेताओं की सक्रियता बढ़ चुकी है और अंदरखाने लगातार मंथन जारी है.
नए चेहरों को दिया जाएगा मौका
सूत्रों के मुताबिक दिग्विजय सिंह ने पार्टी नेतृत्व को यह सुझाव भी दिया है कि इस बार किसी ऐसे चेहरे को मौका दिया जाए जो नए सामाजिक समीकरणों को साध सके. इसके बाद कांग्रेस संगठन में अलग-अलग स्तर पर संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है. पार्टी अब ऐसा उम्मीदवार तलाश रही है जो राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से मजबूत संदेश दे सके. हालांकि कांग्रेस की सबसे बड़ी चिंता उम्मीदवार तय करना नहीं बल्कि मतदान के दौरान विधायकों की एकजुटता बनाए रखना है. विधानसभा में मौजूदा संख्या के हिसाब से पार्टी एक सीट निकाल सकती है, लेकिन क्रॉस वोटिंग की आशंका उसे परेशान कर रही है. अगर भाजपा तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारती है तो मुकाबला और ज्यादा रोमांचक हो सकता है. ऐसी स्थिति में चुनाव पूरी तरह विधायकों की निष्ठा और राजनीतिक गणित पर टिक जाएगा.
कांग्रेस की बढ़ी चिंता
दरअसल कांग्रेस की चिंता के पीछे पिछले चुनावों का अनुभव भी है. 2020 के राज्यसभा चुनाव के दौरान बदले राजनीतिक समीकरणों ने प्रदेश की सत्ता तक बदल दी थी. वहीं 2022 में भी क्रॉस वोटिंग को लेकर काफी चर्चा हुई थी. यही कारण है कि इस बार कांग्रेस कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी आखिर किस चेहरे पर भरोसा जताती है और भाजपा इस मुकाबले को कितना दिलचस्प बनाती है.
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