मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने स्तर पर रणनीति तैयार करने में जुटी हुई हैं. राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 18 जून को मतदान प्रस्तावित है और चुनावी गणित को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं.वर्तमान स्थिति की बात करें तो राज्य की इन तीन सीटों में से दो सीटें बीजेपी के पास हैं, जबकि एक सीट कांग्रेस के खाते में है. मौजूदा विधानसभा संख्या बल को देखते हुए बीजेपी का दो सीटों पर जीत दर्ज करना लगभग तय माना जा रहा है. वहीं यदि कोई अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रम नहीं होता है तो कांग्रेस भी अपनी एक सीट आसानी से बचाने की स्थिति में दिखाई दे रही है.
तीसरे सीट पर उम्मीदवार उतारने से बच रही है बीजेपी
हाल के दिनों में यह चर्चा जोरों पर थी कि बीजेपी तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतार सकती है. इसके पीछे तर्क दिया जा रहा था कि प्रदेश की राजनीति में चल रहे घटनाक्रम और कांग्रेस के कुछ विधायकों से जुड़े कानूनी मामलों का फायदा उठाकर पार्टी अतिरिक्त सीट हासिल करने की कोशिश कर सकती है. हालांकि अब पार्टी सूत्रों से जो संकेत मिल रहे हैं, वे इस संभावना को कमजोर करते नजर आ रहे हैं.
क्या है पूरा गणित यहां समझिये
जानकारी के अनुसार बीजेपी फिलहाल तीसरी सीट के लिए उम्मीदवार उतारने के पक्ष में नहीं है. इतना ही नहीं, पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व भी इस मुद्दे पर नेताओं को सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की सलाह दे रहा है. शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि उम्मीदवारों को लेकर किसी प्रकार की अनावश्यक अटकलें या विवाद खड़े न हों. यदि विधानसभा के आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्य प्रदेश की कुल 230 सीटों में से बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं. राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए 58 मतों की आवश्यकता होती है. ऐसे में बीजेपी अपनी दो सीटें आसानी से जीत सकती है, लेकिन इसके बाद उसके पास पर्याप्त वोट शेष नहीं बचेंगे जिससे वह तीसरी सीट पर भी मजबूत दावा पेश कर सके.
राजनीतिक जानकारों का क्या है मानना
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तीसरी सीट जीतने के लिए बीजेपी को विपक्षी खेमे से अतिरिक्त समर्थन जुटाना पड़ेगा. यही कारण है कि पार्टी फिलहाल जोखिम लेने के बजाय केवल दो सीटों पर ध्यान केंद्रित करती दिखाई दे रही है. संख्या बल के मौजूदा समीकरणों को देखते हुए तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की संभावना काफी कम मानी जा रही है.
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