भोपाल। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों के प्रशासनिक व स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है। विभाग के आदेश के मुताबिक तबादले की प्रक्रिया 8 जून 2026 से शुरू होकर 15 जुलाई 2026 तक चलेगी। इस बार प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और आवेदन एजुकेशन पोर्टल के जरिए से किए जाएंगे।
पहले प्रशासनिक आधार पर होंगे तबादले
नई स्थानांतरण नीति के मुताबिक विभाग सबसे पहले प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर टीचर्स के तबादले करेगा। इसके बाद रिक्त पदों के आधार पर स्वैच्छिक तबादलों की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगामी साल के लिए अलग से नई तबादला नीति जारी नहीं होगी।
प्रशासनिक स्थानांतरण प्रस्तावों का पंजीयन 8 जून से शुरू होगा। वहीं अंतर्जिला तबादलों के लिए शिक्षक 8 से 15 जून तक आवेदन कर सकेंगे। जिला कैडर, संभागीय और राज्य कैडर से जुड़े स्थानांतरण के लिए 8 से 17 जून तक ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दी गई है।
शैक्षणिक सत्र के बीच भी हो सकता है ट्रांसफर
छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए विभाग ने यह व्यवस्था भी लागू की है कि अतिरिक्त शिक्षकों का स्थानांतरण शैक्षणिक सत्र के दौरान भी किया जा सकेगा। इसके लिए काउंसलिंग प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यदि कोई शिक्षक काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग नहीं लेता है तो विभाग प्रशासनिक आधार पर उसका तबादला कर सकेगा।
सरप्लस शिक्षकों को कमी वाले स्कूलों में भेजा जाएगा
विभाग ने स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और कमी का डेटा एजुकेशन पोर्टल पर दर्ज रखने का निर्णय लिया है। जिन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या निर्धारित जरूरत से अधिक होगी, वहां के अतिरिक्त शिक्षकों को शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में पदस्थ किया जाएगा।
इसी प्रकार विभागीय कार्यालयों और अन्य संस्थानों में भी यदि निर्धारित संख्या से अधिक अधिकारी या कर्मचारी पाए जाते हैं तो उन्हें रिक्त पद वाले संस्थानों में स्थानांतरित किया जाएगा।
ऐसे तय होगा कौन है सरप्लस शिक्षक
नई नीति के अनुसार किसी स्कूल में सामान्य स्थिति में सबसे अधिक समय से कार्यरत शिक्षक को अतिरिक्त शिक्षक माना जाएगा। हालांकि यदि पिछले दो वर्षों में स्थानांतरित होकर आए शिक्षकों की वजह से अतिरिक्त स्थिति बनती है तो ऐसे शिक्षकों को सरप्लस श्रेणी में शामिल किया जाएगा।
इसके अलावा यदि कोई शिक्षक मूल पद के साथ उच्च पद का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहा है तो उच्च पद का प्रभार लेने वाले शिक्षक को भी अतिरिक्त श्रेणी में रखा जा सकता है।
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