मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक अहम खबर सामने आई है. राज्य सरकार जल्द ही तबादलों पर लगा प्रतिबंध हटाने की तैयारी में है. माना जा रहा है कि 12 मई के बाद कभी भी यह बैन हटाया जा सकता है, जिसके बाद कर्मचारी 15 जून तक अपने ट्रांसफर करवा सकेंगे. यह फैसला हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान सामने आया, जब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अचानक तबादला नीति को लेकर अधिकारियों से प्रगति के बारे में पूछा. अधिकारियों ने बताया कि नीति लगभग तैयार है और सिर्फ कुछ बिंदुओं पर अंतिम चर्चा बाकी है.
कैबिनेट बैठक में नई तबादला नीति को मंजूरी
काफी समय से लंबित इस नीति को लेकर अब तेजी देखने को मिल रही है. मुख्यमंत्री के सीधे हस्तक्षेप के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि अगली कैबिनेट बैठक में नई तबादला नीति को मंजूरी मिल सकती है. सूत्रों के अनुसार, मुख्य सचिव अनुराग जैन और सामान्य प्रशासन विभाग को जल्द से जल्द नीति को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही यह भी कहा गया है कि ट्रांसफर का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को किसी तरह की परेशानी न हो. हालांकि इस बार सरकार केवल जरूरी तबादलों पर ही ध्यान दे सकती है.
नई नीति के तहत ट्रांसफर प्रक्रिया
नई नीति के तहत ट्रांसफर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था लागू की जाएगी. इससे कर्मचारियों को प्रक्रिया में आसानी होगी और अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी. प्रस्तावित व्यवस्था के मुताबिक, एक जिले से दूसरे जिले में तबादले की मंजूरी संबंधित विभागीय मंत्री देंगे, जबकि जिले के भीतर होने वाले तबादलों का अधिकार प्रभारी मंत्रियों के पास रहेगा. कुछ विशेष मामलों में आवेदन पहले विभाग प्रमुखों के पास जाएंगे और उसके बाद संबंधित मंत्री के पास भेजे जाएंगे.
1 मई से तबादलों की प्रक्रिया शुरू की गई थी
पिछले साल भी 1 मई से तबादलों की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसमें पहली बार अलग अलग स्लैब बनाए गए थे और तबादलों की सीमा को बढ़ाकर 2 से 3 प्रतिशत तक किया गया था. इस बार भी सरकार प्रक्रिया को और बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है.
राज्य स्तरीय व्यापारी कल्याण बोर्ड का गठन होगा
इसी के साथ राज्य सरकार व्यापार और उद्योग से जुड़े लोगों के लिए भी एक नई पहल करने जा रही है. मध्य प्रदेश में जल्द ही एक राज्य स्तरीय व्यापारी कल्याण बोर्ड का गठन किया जाएगा. यह कदम पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की तर्ज पर उठाया जा रहा है. यह बोर्ड राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के मॉडल पर काम करेगा. इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री मोहन यादव होंगे, जबकि एमएसएमई मंत्री, विभिन्न विभागों के अधिकारी और उद्योग क्षेत्र के विशेषज्ञ इसके सदस्य बनाए जाएंगे. इस पहल का उद्देश्य व्यापारियों और उद्योग जगत के हितों को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाना है.









