MP Nikay Chunav: मध्य प्रदेश में साल 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अभी से अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। विधानसभा चुनाव 2028 से ठीक पहले होने वाले स्थानीय चुनावों को कांग्रेस पार्टी अपना सेमीफाइनल मानकर लड़ रही है। यही वजह है कि ऐन वक्त पर होने वाली गुटबाजी और टिकट वितरण के विवादों से बचने के लिए पीसीसी नेतृत्व ने एक चौकाने वाली और नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत चुनाव से करीब छह महीने पहले ही संभावित उम्मीदवारों को हरी झंडी दे दी जाएगी, ताकि वे जमीन पर अपनी पकड़ मजबूत कर सकें।
विधायक निभाएंगे सारथी की भूमिका
कांग्रेस की इस नई चुनावी रचना में पार्टी के मौजूदा विधायकों को सबसे बड़ी और अहम जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। पार्टी अपने विधायकों को सारथी के रूप में मैदान में उतारेगी। प्रत्येक विधायक को अलग-अलग नगर निगमों का प्रभार देकर वहां की कमान सौंपी जाएगी। इन सारथी विधायकों को हर महीने अपने प्रभार वाले क्षेत्रों का अनिवार्य रूप से दौरा करना होगा। वे बूथ कमेटियों के माध्यम से मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य की सीधे निगरानी करेंगे।
सर्वे से तय होंगे नाम
टिकट वितरण में पारदर्शिता रखने के लिए प्रभारी विधायक अपने स्तर पर सर्वे करवाएंगे। इसमें मौजूदा पार्षदों के रिपोर्ट कार्ड के साथ-साथ नए और जिताऊ चेहरों का फीडबैक लिया जाएगा। इतना नही नहीं बीजेपी के विकास के दावों की काट के लिए कांग्रेस इस बार स्थानीय समस्याओं को हथियार बनाएगी। पार्टी इस बार कोई पारंपरिक घोषणा पत्र या वचन पत्र जारी करने के बजाय नगरीय स्तर पर धोखा पत्र तैयार कर रही है। इसमें बीजेपी शासित नगर निगमों के भ्रष्टाचार, अधूरी सड़क-पानी की योजनाओं और जनता से किए गए झूठे वादों का पूरा लेखा-जोखा जनता के बीच रखा जाएगा।
साख बचाने की बड़ी चुनौती
कांग्रेस के लिए यह जमीनी जमावट इसलिए भी करो या मरो जैसी है, क्योंकि पिछले रिकॉर्ड काफी चिंताजनक रहे हैं। साल 2022 के नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस ने प्रदेश के 16 नगर निगमों में से 5 पर महापौर के पदों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन राजनैतिक उठापटक के दौर में 5 में से 3 महापौर कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। अब सूबे में कांग्रेस के पास सिर्फ रीवा और ग्वालियर में दो ही महापौर बचे हैं। इसके अलावा, कुल 854 पार्षदों में से महज 259 पार्षद ही कांग्रेस के पास हैं।
कांग्रेस आलाकमान को इस बात का अहसास है कि यदि 2027 के इस सेमीफाइनल में पार्टी ने जीत की लय हासिल कर ली, तो 2028 में सत्ता की दहलीज पार करना आसान हो जाएगा। इसीलिए कांग्रेस अपनी पूरी ताकत अभी से झोंकने में लग गया है।









