मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है. यह सत्र पांच दिनों तक चलेगा, जिसमें सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन के पटल पर रखने की तैयारी कर रही है. जानकारी के मुताबिक इस बार करीब 11 नए विधेयक पेश किए जा सकते हैं. इनमें समान नागरिक संहिता (UCC), कोचिंग संस्थानों के नियमन, फायर सेफ्टी, नगर विकास, पंचायत व्यवस्था और श्रम कानूनों से जुड़े प्रस्ताव प्रमुख हैं.
सूत्रों के अनुसार, यदि सिंहस्थ मेला अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन समय पर तैयार हो जाता है तो उसे भी इसी सत्र में पेश किया जा सकता है. प्रदेश सरकार ने UCC को लेकर सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी. समिति जनसुझाव लेने की प्रक्रिया पूरी कर चुकी है और अब अपनी रिपोर्ट अंतिम रूप देने में जुटी है. बताया जा रहा है कि 5 जुलाई से पहले यह रिपोर्ट सरकार को सौंप दी जाएगी. इसके बाद मानसून सत्र में UCC विधेयक पेश किए जाने की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है. वहीं, कोचिंग संस्थानों को लेकर भी सरकार नया कानून लाने की तैयारी में है. इस प्रस्ताव पर विभागीय मंत्री इंदर सिंह परमार की मंजूरी के बाद मंगलवार को वरिष्ठ सचिव समिति में विस्तार से चर्चा की गई. केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को भेजे गए मॉडल ड्राफ्ट के आधार पर उच्च शिक्षा विभाग ने अपना मसौदा तैयार किया है.
इन प्रस्तावों पर भी सरकार की तैयारी
- फायर सेफ्टी एक्ट का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इसे मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है.
- नए कानून में आग से होने वाली घटनाओं की रोकथाम और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं.
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए एक समान कालोनाइजर एक्ट लागू करने की तैयारी की गई है.
- नए सिस्टम के तहत पंजीयन सहित सभी प्रक्रियाएं सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए संचालित की जाएंगी.
- स्वामित्व योजना के तहत आबादी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भूखंड और मकान की मुफ्त रजिस्ट्री का लाभ देने की योजना है.
- इसके लिए पंचायत एवं ग्राम स्वराज अधिनियम और स्टांप शुल्क से जुड़े नियमों में संशोधन विधेयक भी सदन में लाए जाएंगे.
अनुपूरक बजट भी होगा पेश
वित्त विभाग वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट भी मानसून सत्र में पेश करेगा. सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि इस बजट में किसी भी विभाग को नए वाहन खरीदने के लिए अतिरिक्त राशि नहीं दी जाएगी.
- केवल उन्हीं योजनाओं को अतिरिक्त बजट मिलेगा, जिन्हें पहले से मंजूरी मिल चुकी है.
- केंद्र सरकार की हिस्सेदारी वाले प्रोजेक्ट्स को भी प्राथमिकता के आधार पर राशि उपलब्ध कराई जाएगी.
- पूंजीगत विकास कार्यों के लिए बजट आवंटन को प्राथमिकता दी जाएगी.







