मध्यप्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय होने लगा है. मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 से 48 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है. बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र, सक्रिय मानसून द्रोणिका और वातावरण में मौजूद पर्याप्त नमी के कारण मौसम तेजी से बदल सकता है. खासतौर पर मध्य और पूर्वी मध्यप्रदेश के जिलों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है. कई इलाकों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश होने के आसार हैं.
बंगाल की खाड़ी की प्रणाली का दिखेगा असर
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्व मौसम वैज्ञानिक शैलेन्द्र कुमार नायक के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे लगे ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बने कम दबाव के क्षेत्र का असर अब मध्यप्रदेश पर भी दिखाई देगा. उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों में प्रदेश में बारिश का वितरण समान नहीं रहा, लेकिन आने वाले दो दिनों में वर्षा की गतिविधियों में स्पष्ट बढ़ोतरी होगी.
इन संभागों में हो सकती है अच्छी बारिश
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार महाकौशल, विंध्य, सागर, भोपाल, नर्मदापुरम और आसपास के क्षेत्रों में मध्यम से लेकर कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है. पूर्वी मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा वर्षा होने की संभावना जताई गई है, जबकि पश्चिमी हिस्सों में भी धीरे-धीरे मानसून सक्रिय होने लगेगा. इसके साथ ही 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और कई स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने का भी खतरा रहेगा.
पिछले 24 घंटे में यहां हुई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के अधिकांश इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई. हालांकि कहीं भी व्यापक स्तर पर अति भारी बारिश नहीं हुई. सबसे अधिक 87.3 मिमी बारिश मैहर जिले के रामनगर में रिकॉर्ड की गई. इसके अलावा सागर के देवरी में 48 मिमी, मंडला के मवई में 34.8 मिमी, बालाघाट के तिरोड़ी में 29.3 मिमी, अनूपपुर के बिजुरी में 29.2 मिमी और रीवा के गुढ़ में 23 मिमी वर्षा दर्ज हुई. पश्चिमी मध्यप्रदेश में खरगोन के भगवानपुरा और बड़वानी के राजपुर में 24-24 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई.
उमसभरी रातों से नहीं मिल रही राहत
बारिश के बावजूद प्रदेश के लोगों को उमस से राहत नहीं मिल रही है. बादलों की अधिकता और हवा में नमी बढ़ने के कारण न्यूनतम तापमान सामान्य से 2 से 6 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर बना हुआ है. इंदौर में सबसे अधिक 29.1 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया. इसके अलावा ग्वालियर, सागर, उज्जैन और टीकमगढ़ में भी रातें अपेक्षाकृत गर्म रहीं.
दतिया, नौगांव, छिंदवाड़ा, जबलपुर और ग्वालियर में सामान्य से काफी अधिक न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार घने बादलों की वजह से रात के समय धरती की गर्मी बाहर नहीं निकल पाई, जिससे उमस बनी रही.
तेज हवाओं के साथ गरज-चमक का असर
पिछले 24 घंटों के दौरान कई जिलों में तेज हवाएं भी चलीं. जबलपुर में 46 किलोमीटर प्रति घंटा, रीवा में 41 किलोमीटर प्रति घंटा, सागर में 39 किलोमीटर प्रति घंटा, सतना में 35 किलोमीटर प्रति घंटा तथा रायसेन और सीधी में 31 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं दर्ज की गईं. मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने तथा बिजली चमकने के समय सावधानी बरतने की सलाह दी है.









