भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में पिछले कुछ दिनों से मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने से बारिश पर लगभग ब्रेक लग गया है। इसका असर आम जनजीवन के साथ-साथ खेती-किसानी पर भी साफ दिखाई देने लगा है। हालांकि मौसम विभाग ने राहत भरी संभावना जताई है। विभाग के अनुसार 6 अगस्त से प्रदेश में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिसके प्रभाव से कई जिलों में बारिश की गतिविधियां फिर तेज हो सकती हैं। कुछ इलाकों में भारी वर्षा होने की भी संभावना व्यक्त की गई है।
6 अगस्त से बदलेगा मौसम का मिजाज
मौसम विभाग के मुताबिक गुरुवार, 6 अगस्त से सक्रिय होने वाला पश्चिमी विक्षोभ प्रदेश में नमी बढ़ाएगा। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश के अनेक हिस्सों में अच्छी बारिश होने के आसार हैं, जबकि कुछ जिलों में तेज से भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह नया सिस्टम प्रदेश में चल रही बारिश की कमी को काफी हद तक पूरा करने में मददगार साबित हो सकता है।
सामान्य से 16 फीसदी कम बारिश
मानसून सीजन के दौरान अब तक मध्य प्रदेश में औसत से करीब 16 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। प्रदेश में अब तक लगभग 15.9 इंच बारिश हुई है, जबकि सामान्य स्थिति की तुलना में करीब 3.1 इंच पानी की कमी बनी हुई है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण यह अंतर और बढ़ गया।
पूर्वी मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा असर
बारिश की कमी का सबसे अधिक प्रभाव प्रदेश के पूर्वी हिस्से में देखा जा रहा है। जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में औसतन करीब 20 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। कई जिलों में हालात इससे भी अधिक चिंताजनक बने हुए हैं।
इन जिलों में सबसे अधिक कमी
अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडोरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया सहित कई जिलों में सामान्य से 1 से 42 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।
पश्चिमी मध्यप्रदेश भी पीछे
प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में भी बारिश सामान्य से कम रही है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम तथा ग्वालियर-चंबल संभाग में औसतन 11 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज हुई है। वहीं आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, झाबुआ, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा जिलों में भी सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।
किसानों की बढ़ी चिंता
बारिश की कमी का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ रहा है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से फसलों की बढ़वार प्रभावित होने लगी है। इसके साथ ही जलाशयों, बांधों और अन्य जल स्रोतों में भी अपेक्षित जलभराव नहीं हो पाया है। ऐसे में किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि फसलों को पर्याप्त नमी मिल सके।
अगले कुछ दिन रहेंगे अहम
मौसम विभाग की नजर 6 अगस्त से सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ पर टिकी हुई है। यदि यह सिस्टम अनुमान के अनुरूप प्रभावी रहा तो प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश हो सकती है। इससे बारिश की कमी दूर होने के साथ खेती, जल भंडारण और पेयजल व्यवस्था को भी राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विशेषज्ञों ने लोगों से मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों और पूर्वानुमानों पर लगातार नजर बनाए रखने की अपील की है।
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