MP Wheat Scam: आगर मालवा जिले के ग्राम खजुरी में सरकारी गेहूं खरीदी की आड़ में चल रहे एक बड़े खेल का खुलासा हुआ है। गायत्री स्व सहायता समूह द्वारा बिना किसी आधिकारिक अनुमति के एक निजी घर के बाहर पैरेलल खरीदी केंद्र संचालित किया जा रहा था। कार्यपालक मजिस्ट्रेट अरुण चंद्रवंशी की टीम ने मौके पर दबिश देकर भारी मात्रा में सरकारी बारदाना और गेहूं जब्त किया है।
हुए चौंकाने वाले खुलासे
मजिस्ट्रेट की कार्रवाई के दौरान मौके पर जो मंजर दिखा, उसने प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने की पूरी कहानी बयां कर दी। मौके से 500 से अधिक गेहूं से भरे हुए नए सरकारी बोरे बरामद किए गए हैं। जांच टीम को 250 से ज्यादा खाली सरकारी बारदान भी मिले, जिनका इस्तेमाल अवैध खरीदी के लिए किया जाना था। छापेमारी के समय 3 से 4 ट्रैक्टर गेहूं से लदे हुए खड़े थे, जो इस बात का प्रमाण हैं कि वहां बड़े स्तर पर अवैध तुलाई चल रही थी।
7 किलोमीटर दूर चल रहा था अवैध खेल
जांच में सामने आया है कि गायत्री स्व सहायता समूह को सुसनेर में खरीदी की अनुमति दी गई थी। लेकिन नियमों को ठेंगा दिखाते हुए, समूह ने सुसनेर से करीब 7 किलोमीटर दूर खजुरी गांव में एक निजी घर के बाहर अपना अवैध अड्डा बना लिया था। संस्था ने दावा किया कि उन्हें जिला खाद्य अधिकारी से मौखिक अनुमति मिली हुई है, जबकि कागजों पर ऐसी कोई अनुमति अस्तित्व में नहीं थी। समूह सुसनेर के वेयरहाउस में बहुत ही सीमित और नाममात्र की खरीदी दिखाकर यह साबित करने की कोशिश कर रहा था कि वह नियमों का पालन कर रहा है।
आखिर जिम्मेदार कौन?
इस घोटाले के उजागर होने के बाद कई ऐसे सवाल हैं जो जिला प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करते हैं। बिना किसी अधिकृत सर्वेयर के गेहूं की गुणवत्ता की जांच कौन कर रहा था? इतने बड़े स्तर पर अवैध केंद्र का संचालन क्या स्थानीय मिलीभगत के बिना संभव है? जिन किसानों ने यहां गेहूं बेचा है, उनके भुगतान और उस गेहूं के स्टॉक का अब क्या होगा? मुख्यमंत्री मोहन यादव जहां खुद गेहूं खरीदी केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने में जुटे हैं, वहीं उनके ही संभाग में इस तरह का घोटाला सामने आना बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। फिलहाल कार्यपालक मजिस्ट्रेट अरुण चंद्रवंशी की रिपोर्ट के बाद प्रशासन मामले की तह तक जाने में जुट गया है।







