बारिश के मौसम में बाजार में मांग और सप्लाई का संतुलन बिगड़ने का असर अब आम लोगों की रसोई पर साफ दिखाई देने लगा है. शक्कर के अलावा सरसों तेल, प्याज और टमाटर जैसी रोज इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के दाम में भी तेजी दर्ज की जा रही है. कारोबारियों का कहना है कि बाजार में नई फसल की आवक शुरू होने में अभी समय है, इसलिए आने वाले दिनों में कुछ जरूरी सामान और महंगा हो सकता है.
खास तौर पर सरसों और प्याज की कीमतों को लेकर कारोबारियों में चिंता है. उनका मानना है कि नई फसल आने तक बाजार में मौजूदा दबाव बना रह सकता है. हालांकि नींबू और टमाटर को छोड़ दें तो फिलहाल अधिकांश हरी सब्जियों के भाव सामान्य स्तर पर हैं और आम उपभोक्ताओं की पहुंच में बने हुए हैं.
सरकारी आंकड़ों और बाजार भाव में अंतर
जिला प्रशासन की ओर से ऑनलाइन जारी की जाने वाली 23 घरेलू वस्तुओं की कीमतों और बाजार में चल रहे वास्तविक भाव में भी अंतर देखने को मिल रहा है. व्यापारियों के अनुसार, इसका एक प्रमुख कारण अलग-अलग बाजारों से लिए गए दामों का औसत निकालकर रिपोर्ट तैयार किया जाना है. इसी वजह से सरकारी रिपोर्ट में दर्ज कीमत और दुकानों पर ग्राहकों से लिए जा रहे भाव अलग नजर आ रहे हैं.
सरसों तेल की मांग में 30 फीसदी बढ़ोतरी
प्रशासनिक रिपोर्ट में सरसों तेल की कीमत 181 रुपये प्रति किलो बताई गई है, जबकि थोक बाजार में यह करीब 168 से 170 रुपये किलो बिक रहा है. तेल कारोबारी अनिल पंजवानी के मुताबिक, सोयाबीन और मूंगफली तेल की मांग में कमी आई है, जबकि लोगों का रुझान सरसों तेल की तरफ बढ़ा है. इसके चलते इसकी मांग करीब 30 फीसदी तक बढ़ गई है.
मंडियों में नई सरसों की आवक फिलहाल नहीं है और दूसरी ओर मांग लगातार बनी हुई है. ऐसे में अगले कुछ दिनों में सरसों तेल के भाव में करीब 10 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है. खुदरा बाजार में इसकी कीमत 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है.
प्याज के भाव ने बढ़ाई चिंता
प्याज की कीमतों में भी पिछले कुछ समय में तेज उछाल आया है. अगस्त की शुरुआत में करीब 22 रुपये किलो बिकने वाला प्याज अब थोक बाजार में 40 रुपये और खुदरा बाजार में 50 से 55 रुपये किलो तक पहुंच गया है. वहीं, दो दिन पहले की सरकारी रिपोर्ट में प्याज का भाव 30 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया था.
सब्जी विक्रेता कप्तान सिंह के अनुसार, लगातार बारिश के कारण मंडियों में प्याज की आवक काफी घट गई है, जबकि बाजार में मांग बनी हुई है. नई प्याज की फसल नवंबर के बाद आने की उम्मीद है. इसके बाद ही कीमतों में राहत मिलने की संभावना है. इस बीच नींबू के दाम भी बढ़े हुए हैं, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.









