मध्य प्रदेश के नीमच जिले में प्रशासन ने सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये की संपत्ति को ध्वस्त कर दिया. इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल बन गया है. नगर परिषद मनासा और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में करीब 7 करोड़ रुपये मूल्य की शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया. जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई मनासा नगर के माहेश्वरम कॉलोनी क्षेत्र के पास स्थित नजूल भूमि पर की गई. प्रशासन का कहना है कि इस जमीन पर नियमों को दरकिनार कर अवैध निर्माण किया गया था, जिसके खिलाफ लंबे समय से जांच और कानूनी प्रक्रिया चल रही थी.
भाजपा नेता पर लगे नियमों के उल्लंघन के आरोप
मामले में भाजपा नेता उज्जवल पटवा का नाम भी सामने आया है. आरोप है कि कई वर्ष पहले सरकारी भूमि का नामांतरण नियमों के विपरीत कराया गया था. इस मामले को लेकर वर्ष 2012 से ही विवाद बना हुआ था. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जिस स्थान पर सीमित निर्माण की अनुमति दी गई थी, वहां निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया. नगर परिषद के अनुसार वर्ष 2022 में केवल एक दुकान निर्माण की अनुमति प्रदान की गई थी. लेकिन स्वीकृत नक्शे और शर्तों के विपरीत वहां एक के बजाय आठ दुकानों का निर्माण कर लिया गया. इतना ही नहीं, निर्माण कार्य के लिए आवश्यक विभागीय मंजूरी और व्यावसायिक डायवर्सन की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई थी.
परिषद ने पहले ही रद्द कर दी थी अनुमति
नगर परिषद मनासा ने इस पूरे मामले की समीक्षा के बाद जनवरी 2026 में एक प्रस्ताव पारित किया था. इस प्रस्ताव के तहत निर्माण अनुमति और विवादित नामांतरण दोनों को निरस्त कर दिया गया था. इसके बाद मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी. बताया जा रहा है कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद प्रशासन ने अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू की. निर्धारित कार्रवाई के तहत मौके पर पहुंची टीम ने निर्माण को पूरी तरह जमींदोज कर दिया. प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस कार्रवाई के बाद जिले में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. वहीं स्थानीय स्तर पर भी यह मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.
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