निवाड़ी। जिले में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने और किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिए प्रशासन ने अब कमर कस ली है। इसी कड़ी में निवाड़ी कलेक्टर जमुना भिड़े ने हाल ही में जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से सीधा संवाद कर उन्हें पारंपरिक खेती के साथ-साथ प्राकृतिक, जैविक और औषधीय फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि खेती की लागत को कम किया जा सके और मिट्टी की सेहत भी सुरक्षित रहे।
प्राकृतिक खेती का निरीक्षण
अपने दौरे की शुरुआत करते हुए कलेक्टर भिड़े ने निवाड़ी विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम चचावली का दौरा किया। यहां उन्होंने आत्मा योजना और प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्रगतिशील किसानों द्वारा बनाए गए बायो रिसोर्स सेंटर का बारीकी से जायजा लिया।
- जीवामृत और जैविक आदान: केंद्र पर जीवामृत और अन्य प्राकृतिक कृषि आदानों (इनपुट्स) को तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली गई। कलेक्टर ने स्थानीय स्तर पर ही जैविक खाद और जीवामृत तैयार करने के महत्व पर खास जोर दिया।
- फसलों का अवलोकन: केंद्र के निरीक्षण के बाद उन्होंने प्राकृतिक विधियों से उगाई गई धान, अरहर और ज्वार की लहलहाती फसलों का निरीक्षण किया।
- किसानों को संदेश: किसानों से बातचीत के दौरान कलेक्टर ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति पर चिंता जताई। उन्होंने किसानों को समझाया कि प्राकृतिक पद्धतियों को अपनाने से न केवल उत्पादन खर्च में कमी आती है, बल्कि जमीन की उपजाऊ क्षमता भी लंबे समय तक बनी रहती है।
औषधीय खेती की अनूठी पहल
ग्राम चचावली के बाद कलेक्टर ने ग्राम नेगुआ का रुख किया, जहां परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत औषधीय फसलों की खेती की जा रही है।
- तुलसी की खेती का जायजा: इस गांव में किसानों द्वारा बड़े पैमाने पर राम तुलसी और श्याम तुलसी की खेती की जा रही है। कलेक्टर ने इन फसलों का अवलोकन किया और किसानों से इसकी बुवाई, प्रबंधन एवं कटाई की पूरी प्रक्रिया समझी।
- बढ़ती आय का विकल्प: किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि तुलसी जैसी औषधीय फसलें पारंपरिक खरीफ फसलों के मुकाबले अधिक मुनाफा कमाने का एक शानदार और बेहतर विकल्प साबित हो रही हैं।
- बाजार और विपणन पर चर्चा: कलेक्टर ने किसानों के साथ बाजार में औषधीय पौधों की मांग, उत्पादन लागत और विपणन (मार्केटिंग) व्यवस्था को लेकर लंबी चर्चा की। उन्होंने किसानों को प्रोत्साहित किया कि वे केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित न रहें, बल्कि आधुनिक और वैकल्पिक खेती के जरिए अपनी आय को कई गुना बढ़ाएं।
मिट्टी के संरक्षण और वैकल्पिक खेती पर जोर
इस पूरे दौरे का मुख्य उद्देश्य किसानों को कृषि के वैकल्पिक तरीकों के प्रति जागरूक करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना था। कलेक्टर भिड़े ने अधिकारियों और किसानों को निर्देश दिए कि वे मिट्टी के स्वास्थ्य का संरक्षण करें, खेती की लागत को नियंत्रित करने के नए तरीके अपनाएं और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ें।
इस मौके पर उप संचालक कृषि (डीडीए) हरीश मालवीय, भारत राजवंशी सहित कृषि विभाग के तमाम संबंधित अधिकारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।









