ओंकारेश्वर/खबर डिजिटल/ तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में मां नर्मदा की गहराई और नदी तल की वास्तविक स्थिति जानने के लिए पहली बार प्रोफेशनल स्कूबा डाइविंग की गई। झूला पुल के नीचे प्रशिक्षित स्कूबा डाइवर करीब 210 फीट की गहराई तक पहुंचे और टॉर्च की रोशनी में नदी के तल का निरीक्षण किया। गहराई बढ़ने के साथ पानी का दबाव भी बढ़ता गया, लेकिन निर्धारित सुरक्षा मानकों के तहत डाइविंग अभियान पूरा किया गया। नदी तल पर बड़े-बड़े पत्थरों के बीच कुछ मूर्तियां, सिक्के और छोटे पौधे दिखाई दिए। हालांकि, डाइविंग के दौरान किसी तरह के आभूषण या अन्य कीमती सामान मिलने की जानकारी सामने नहीं आई है।
भोपाल की टीम ने किया डाइविंग अभियान
यह विशेष अभियान मां रेवा मांझी नाविक संघ की ओर से कराया गया। भोपाल की पायनियर वॉटर स्पोर्ट्स टीम ने इसमें हिस्सा लिया। टीम के PADI गाइड मास्टर इंस्ट्रक्टर यासिर हसीब ने विशेष उपकरणों और टॉर्च की मदद से करीब 210 फीट नीचे जाकर नर्मदा के नदी तल का निरीक्षण किया।
210 फीट नीचे क्या दिखा?
स्कूबा डाइवर यासिर हसीब के मुताबिक गहराई बढ़ने के साथ पानी का दबाव लगातार बढ़ता गया। सुरक्षा प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्होंने नदी तल तक पहुंचकर वहां की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान बड़े पत्थरों के बीच कुछ मूर्तियां और सिक्के नजर आए। इसके अलावा छोटे पौधे भी दिखाई दिए। डाइवर के मुताबिक नदी तल पर अत्यधिक गंदगी नजर नहीं आई।
क्या 300-350 फीट गहरी है नर्मदा?
ओंकारेश्वर के झूला पुल के नीचे नर्मदा की गहराई को लेकर स्थानीय नाविक लंबे समय से 300 से 350 फीट तक के अनुमान बताते रहे हैं। हालांकि ये आंकड़े मुख्य रूप से स्थानीय नाविकों के अनुभव पर आधारित रहे हैं। ऐसे में पहली बार प्रोफेशनल स्कूबा डाइविंग के जरिए 210 फीट तक पहुंचकर किया गया प्रत्यक्ष निरीक्षण महत्वपूर्ण है। हालांकि, 210 फीट की गहराई को नर्मदा की अधिकतम गहराई नहीं माना जा सकता। नदी की वास्तविक और अधिकतम गहराई निर्धारित करने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे की जरूरत होगी।
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गहराई में डाइविंग के लिए खर्च होती है महंगी गैस
यासिर हसीब के अनुसार इतनी अधिक गहराई पर डाइविंग सामान्य स्कूबा डाइविंग से काफी अलग होती है। गहराई बढ़ने के साथ पानी का दबाव बढ़ता है और सुरक्षा संबंधी सावधानियां भी बढ़ जाती हैं। एक डाइव में करीब 10 से 12 हजार रुपये तक की गैस खर्च होने की जानकारी दी गई। डाइव पूरी करने के बाद सेफ्टी स्टॉप समेत निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया का पालन किया गया और डाइवर को सुरक्षित तरीके से वापस सतह पर लाया गया।
नाविक संघ ने की नर्मदा संरक्षण की मांग
मां रेवा मांझी नाविक संघ के अध्यक्ष भोलाराम केवट ने कहा कि नर्मदा केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि ओंकारेश्वर की पहचान भी इससे जुड़ी है। इसलिए नदी की सफाई और संरक्षण को लेकर गंभीरता से काम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रोफेशनल डाइविंग के जरिए नदी की गहराई और तल की स्थिति को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला है। अब आवश्यकता है कि नदी के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक तरीके से आगे भी सर्वे और सफाई अभियान चलाए जाएं।
नदी तल में मिली मूर्तियां और सिक्के बनी चर्चा का विषय
स्कूबा डाइविंग के दौरान नदी तल में मूर्तियों और सिक्कों का नजर आना नर्मदा से जुड़ी आस्था के एक अलग पहलू को सामने लाता है। माना जा रहा है कि श्रद्धालुओं द्वारा धार्मिक आस्था के चलते छोड़ी गई कुछ वस्तुएं लंबे समय से नदी के भीतर मौजूद हैं। ओंकारेश्वर जैसे धार्मिक क्षेत्र में नर्मदा का विशेष महत्व है। ऐसे में नदी तल की नियमित निगरानी, वैज्ञानिक सर्वे और सफाई से न केवल नदी के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित किया जा सकता है, बल्कि इसकी वास्तविक गहराई और अंदरूनी संरचना को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई जा सकती है।
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