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खबर डिजिटल संवाददाता कटनी --लोक सेवा गारंटी अधिनियम को कागजों में सीमित समझने वाले पंचायत सचिवों पर अब प्रशासन का शिकंजा कसना शुरू हो गया है। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और विवाह पंजीयन जैसे जरूरी दस्तावेज समय पर जारी नहीं करना पांच पंचायत सचिवों को महंगा पड़ गया। कलेक्टर आशीष तिवारी के सख्त तेवरों के बाद इन अधिकारियों पर कुल 19 हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया गया है।दरअसल, आम नागरिक महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी समय-सीमा में आवेदन निपटाने की अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे। मामला जब लोक सेवा गारंटी अधिनियम की समीक्षा बैठक में सामने आया तो कलेक्टर ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।जांच में खुलासा हुआ कि जन्म प्रमाण पत्र और विवाह पंजीयन से जुड़े 11 आवेदन तय समय-सीमा के बाद निपटाए गए। पहले संबंधित पंचायत सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, लेकिन संतोषजनक जवाब तो दूर, कई मामलों में कोई जवाब तक नहीं दिया गया। इसके बाद प्रशासन ने सीधे जुर्माना लगाने की कार्रवाई कर दी।कार्रवाई के तहत ग्राम पंचायत पोंनिया के सचिव हिम्मत सिंह पर 3 हजार रुपये, नदवान की सचिव राजकुमारी चतुर्वेदी पर 5 हजार रुपये, छिहाइपिपरिया के सचिव दीपक कुमार गौतम पर 1 हजार रुपये, बड़वारा के सचिव रंजीत सिंह चौहान पर 7 हजार 500 रुपये और इमलाज के सचिव राजकुमार श्रीवास पर 2 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।सबसे बड़ी बात यह है कि यह राशि सीधे संबंधित कर्मचारियों के वेतन से काटी जाएगी। इतना ही नहीं, अधिनियम के प्रावधानों के तहत वसूली गई राशि प्रभावित आवेदकों को प्रतिकार यानी मुआवजे के रूप में भी दी जाएगी।यह कार्रवाई उन अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए साफ संदेश है जो सरकारी सेवाओं को समय पर उपलब्ध कराने में लापरवाही बरतते हैं। अब फाइल दबाकर रखने या आवेदकों को अनावश्यक चक्कर लगवाने की कीमत सीधे जेब से चुकानी पड़ेगी।









