क्या आपके इलाके में कचरा गाड़ी समय पर नहीं आती या सड़कों के किनारे कचरे और धूल के ढेर लगे रहते हैं? मध्य प्रदेश के शहरी निवासियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रगति-50' पहल के तहत प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों—इंदौर, भोपाल और उज्जैन को देश के 50 मॉडल यानी आदर्श स्वच्छ शहरों में चुना गया है. इस योजना के जमीनी स्तर पर लागू होने के बाद मोहल्लों की सूरत पूरी तरह बदलने वाली है और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में सीधा सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा.
सड़कों पर नहीं दिखेंगे कचरे के ढेर, घर-घर से कचरा उठाने का सिस्टम होगा और भी हाई-टेक
'प्रगति-50' मिशन के तहत इन तीनों शहरों में नागरिक सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए युद्ध स्तर पर काम शुरू किया जा रहा है. योजना के अंतर्गत मोहल्लों की गलियों, मुख्य सड़कों और कॉलोनियों के मोड़ पर बनने वाले कचरे के ढेरों यानी 'ब्लैक स्पॉट्स' को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा. सड़कों की नियमित सफाई और उन्हें धूल-मुक्त बनाने पर विशेष जोर रहेगा. इसके अलावा डोर-टू-डोर कचरा उठाने की व्यवस्था को ज्यादा हाई-टेक और समयबद्ध बनाया जाएगा, जिसमें गीले और सूखे कचरे को घर के स्तर पर ही अलग-अलग एकत्र करने के नियमों का सख्ती से पालन होगा.
पार्कों का सौंदर्यीकरण और सीवेज की समस्या का मिलेगा पक्का समाधान
इस पहल के जरिए केवल सफाई ही नहीं, बल्कि बस्तियों और कॉलोनियों के सार्वजनिक परिसरों का कायाकल्प भी किया जाएगा. स्थानीय पार्कों, बाजारों और चौराहों को सुंदर बनाया जाएगा ताकि आसपास का वातावरण स्वच्छ और आकर्षक दिखे. इसके साथ ही सीवेज और गंदे पानी की पुरानी समस्या से भी राहत मिलने जा रही है. तरल अपशिष्ट प्रबंधन यानी लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के माध्यम से जलनिकासी की व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा, जिससे सड़कों पर जलजमाव और बदबू की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो सके.







