भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को जाति प्रमाणपत्र विवाद में बड़ी राहत मिली है। राज्यस्तरीय जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति ने विस्तृत जांच के बाद उनके अनुसूचित जाति (SC) प्रमाणपत्र को वैध माना है। समिति ने साफ कहा कि जांच में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि मंत्री प्रतिमा बागरी का परिवार राजपूत समुदाय से संबंध रखता है।
समिति ने अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। वहीं, सरकारी रिकॉर्ड और पुराने दस्तावेज मंत्री के परिवार के अनुसूचित जाति से होने की पुष्टि करते हैं।
1950 से अब तक के रिकॉर्ड बने सबसे बड़ा आधार
जांच के दौरान समिति ने 1950 से अब तक के राजस्व अभिलेख, वंशावली, शैक्षणिक रिकॉर्ड, जाति प्रमाणपत्र, निर्वाचन रिकॉर्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों की जांच की।
समिति के अनुसार आजादी के बाद के शुरुआती राजस्व रिकॉर्ड सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। इनमें मंत्री प्रतिमा बागरी के परिवार की जाति 'बागरी' दर्ज है। समिति ने माना कि इतने पुराने रिकॉर्ड में बाद में बदलाव की संभावना बहुत कम होती है, इसलिए इन्हें विशेष महत्व दिया गया।
कांग्रेस नेता ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाणपत्र को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
24 अप्रैल को हाईकोर्ट ने मामले का अंतिम निर्णय राज्यस्तरीय जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति पर छोड़ दिया था। कोर्ट ने समिति को 60 दिनों के भीतर फैसला देने का निर्देश दिया था। समिति ने तय समय से पहले ही 14 जुलाई को अपना फैसला सुनाते हुए जाति प्रमाणपत्र को वैध घोषित कर दिया।
इन अधिकारियों ने की जांच
राज्यस्तरीय जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति में अध्यक्ष गुलशन बामरा, सचिव सत्येंद्र सिंह और सदस्य के रूप में विषय विशेषज्ञ मातादीन कनेरिया तथा सुधीर श्रीवास्तव शामिल थे। समिति ने सभी दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद अपना निर्णय दिया।
ये खबर भी पढ़ें..









