कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई में विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की. राष्ट्रपति से मिलने के बाद राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में वोटों की हेराफेरी हो रही है. उन्होंने सीधे तौर पर पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा. राहुल का कहना था कि जब उन्होंने राष्ट्रपति के सामने यह बात रखी, तो उन्होंने इस तथ्य को खारिज नहीं किया.
इससे पहले 'इंडिया' गठबंधन के सांसदों ने संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च निकालने की कोशिश की थी. हालांकि पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देते हुए उन्हें विजय चौक पर ही बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया. इसके बाद पूर्व-निर्धारित 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ही राष्ट्रपति भवन ज्ञापन सौंपने गया. इस दल में जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला, सुप्रिया सुले, मनोज झा, थोल. थिरुमावलवन, ईटी मोहम्मद बशीर, एमए बेबी और डी राजा जैसे दिग्गज नेता शामिल थे.
मार्च से पहले विपक्षी सांसद संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में इकट्ठा हुए थे. वहां उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में गड़बड़ी और चुनाव आयोग की भूमिका के खिलाफ आगे के आंदोलन की रणनीति बनाई. सांसदों का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग करना है. विजय चौक पर रोके जाने के दौरान विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी भी की.
कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली में आवाजाही पर लगी पाबंदियों को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी में अघोषित आपातकाल जैसे हालात बना दिए गए हैं. मेट्रो स्टेशन बंद किए जा रहे हैं और ट्रेनें रोकी जा रही हैं, जिससे पता चलता है कि सरकार पूरी तरह डरी हुई है. उन्होंने साफ किया कि उनका यह आंदोलन आगे भी मजबूती से जारी रहेगा.
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पार्टी की मांगें रखते हुए कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा नहीं होता, तब तक उनका प्रदर्शन नहीं थमेगा. विपक्ष चाहता है कि एसआईआर प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगे, मतदाता सूची से हटाए गए 13.8 करोड़ लोगों के नाम वापस जोड़े जाएं और आने वाले चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं. इसके अलावा उन्होंने संसद द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त को दिए गए कानूनी संरक्षण वाले प्रावधान को भी खत्म करने की मांग की.









