मध्यप्रदेश में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राहुल गांधी का प्रदेश की धरती पर स्वागत करते हुए उन्हें कांग्रेस के पुराने शासन का हिसाब जनता के सामने रखने की सलाह दी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने लंबे समय तक देश पर शासन किया है और इस दौरान जनता को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. ऐसे में पार्टी को अपने पुराने फैसलों और नीतियों के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए.
राहुल गांधी का MP में स्वागत, CM ने दी सलाह
राजधानी भोपाल में मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उन्हें राहुल गांधी के मध्यप्रदेश आने की जानकारी मिली है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में उनका स्वागत है और उन्हें जनता के बीच आकर अपनी बात रखनी चाहिए.
हालांकि, मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी से यह भी कहा कि मध्यप्रदेश आने के दौरान उन्हें कांग्रेस के लंबे शासनकाल का हिसाब भी जनता के सामने रखना चाहिए. डॉ. यादव ने गांधी परिवार के पुराने शासन का जिक्र करते हुए कहा कि राहुल गांधी के परनाना, दादी और पिता ने लंबे समय तक केंद्र की सत्ता संभाली. इस दौरान देश और राज्यों में जो परिस्थितियां बनीं, उनके लिए कांग्रेस को जवाब देना चाहिए.
MP की जनता सब जानती है
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की जनता काफी जागरूक है. वह देश और प्रदेश के इतिहास को भी समझती है और वर्तमान परिस्थितियों पर भी उसकी नजर है. ऐसे में राहुल गांधी को जनता के बीच आकर कांग्रेस के पुराने शासनकाल की कमियों और गलतियों पर जवाब देना चाहिए.
डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश राहुल गांधी का इंतजार कर रहा है. उन्होंने कांग्रेस से पुराने फैसलों को लेकर जनता से माफी मांगने की बात भी कही.
शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस पर निशाना
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के पुराने शासनकाल पर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय स्कूली विद्यार्थियों को लैपटॉप और साइकिल जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं. यहां तक कि राष्ट्रीय पर्वों पर मिलने वाले लड्डुओं तक के लिए विद्यार्थियों को इंतजार करना पड़ता था.
डॉ. यादव ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान युवाओं और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति बेहतर नहीं थी. उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के गठन के बाद लंबे समय तक राज्य का बजट सीमित रहा. वर्ष 1956 से 2002-03 तक प्रदेश का कुल बजट करीब 20 हजार करोड़ रुपये के स्तर पर था.
मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि आजादी के बाद करीब 55 वर्षों में मध्यप्रदेश में केवल पांच मेडिकल कॉलेज स्थापित हुए थे. उन्होंने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए कांग्रेस के पुराने शासनकाल में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति पर सवाल खड़े किए.









