Meenakshi Natarajan: मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने का मामला अब राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। कांग्रेस को लगे इस बड़े झटके के बाद, गुरुवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और राष्ट्रीय संगठन के निर्देश पर दिल्ली में एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में कांग्रेस के सभी राष्ट्रीय महासचिव, राज्यों के प्रभारी और प्रदेश कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्ष शामिल हुए। बैठक के बाद कांग्रेस आलाकमान ने साफ कर दिया है कि वे भाजपा की तानाशाही के सामने झुकने वाले नहीं हैं और वे अब सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ेंगे।
भाजपा का तानाशाही रवैया
कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने बैठक में लिए गए बड़े फैसलों की जानकारी देते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश में हमारी प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का फॉर्म सिर्फ इसलिए निरस्त कर दिया गया क्योंकि उन्होंने चुनावी हलफनामे में एक अदालती नोटिस का जिक्र नहीं किया था। हकीकत यह है कि उनके खिलाफ देश की किसी भी अदालत या थाने में न तो कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज है, न कोई एफआईआर है और न ही कोई चार्जशीट दाखिल है। इसके बावजूद तानाशाही रवैया अपनाते हुए उनका फॉर्म रिजेक्ट कर दिया गया।।
झारखंड पर बोले वेणुगोपाल
वेणुगोपाल ने आगे कहा कि दूसरी तरफ झारखंड में भाजपा समर्थित एक बड़े कॉरपोरेट घराने के उम्मीदवार ने अपने नामांकन पत्र के कॉलम में अपना नाम तक ठीक से नहीं लिखा था। इतनी बड़ी गलती के बाद भी वहां के रिटर्निंग ऑफिसर ने भाजपा के दबाव में उस फॉर्म को स्वीकार कर दिया।
सांसदों-विधायकों का इस्तीफा
वेणुगोपाल ने आक्रोश जताते हुए कहा कि भाजपा का एक ही काम रह गया है, दूसरी पार्टियों के चुने हुए सांसदों और विधायकों को साम-दाम-दंड-भेद से अपनी तरफ मिलाओ, उनसे जबरन इस्तीफे दिलवाओ और फिर उन्हें अपनी पार्टी का सिंबल देकर संसद या विधानसभा भेजो। कांग्रेस नेतृत्व ने कहा कि पहले यह लोग जनता के जनादेश का अपमान करते हुए वोटों की चोरी करते थे, लेकिन मध्य प्रदेश और झारखंड के इन घटनाक्रमों ने साबित कर दिया है कि अब देश में सीटों की चोरी का एक नया और खेल शुरू हो चुका है।
राहुल गांधी का बड़ा फैसला
इस आपातकालीन सांगठनिक बैठक में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में दो टूक फैसले लिए गए। कांग्रेस कार्यसमिति ने तय किया है कि मध्य प्रदेश में जो कुछ भी हुआ, उसके बाद कार्यकर्ताओं को निराश होने की जरूरत नहीं है। पार्टी इस मामले को लेकर राजनैतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर मजबूती से लड़ेगी। मध्य प्रदेश के विधायकों को दिल्ली बुलाकर राष्ट्रपति के सामने परेड कराने के फैसले को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस इस मुद्दे को संसद के आगामी सत्र में भी पूरी ताकत से उठाएगी ताकि देश के सामने बीजेपी के इस सीट चोरी मॉडल को बेनकाब किया जा सके।









