डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/डिंडौरी, विकास कार्यों में खानापूर्ति और कागजी मजबूती की पोल एक बार फिर प्रशासनिक चौखट पर खुल गई है। मामला जनपद बजाग के ग्राम पड़रिया का है, जहाँ 31 अगस्त को अचानक एक भारी-भरकम विद्युत ट्रांसफार्मर भरभराकर जमीन पर आ गिरा। गनीमत यह रही कि हादसे के वक्त मौके पर कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ी जनहानि टल गई। लेकिन इस हादसे ने ठेकेदारों की नीयत और बिजली विभाग की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का आरोप था कि ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई गई थी। कंक्रीट और गिट्टी का मजबूत बेसमेंट बनाने के बजाय सीमेंट के खंभों को महज गड्ढे खोदकर मिट्टी में 'रोप' दिया गया था। जैसे ही बारिश का पानी गड्ढों में गया, मिट्टी धसक गई और खंभे वजन सह न पाने के कारण टूटकर गिर गए।
आक्रोशित ग्रामीणों ने इस मामले की सीधी शिकायत कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया से की। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 24 घंटे के भीतर 01 सितंबर को तहसीलदार बजाग, जनपद पंचायत सीईओ और विद्युत विभाग के कनिष्ठ अभियंता की संयुक्त टीम को मौके पर जांच के लिए भेजा।
जांच दल ने जब जमीनी हकीकत देखी तो ग्रामीणों के आरोप शत-प्रतिशत सही पाए गए। खंभों की नींव में सीमेंट का दूर-दूर तक नामोनिशान नहीं था। जांच रिपोर्ट मिलते ही कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए ठेका फर्म मेसर्स जे.आर.डी. स्मार्ट सॉलूशन सिंगरौली के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही बिजली विभाग को हिदायत दी गई है कि गांव की ठप पड़ी बिजली आपूर्ति को तुरंत बहाल किया जाए और मानकों के अनुसार मजबूत बेसमेंट तैयार करके ही नया ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति न हो।









