रायसेन/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में सरकारी योजनाओं और खरीदी व्यवस्था को लेकर एक और कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। रायसेन जिले में सरकारी मूंग खरीदी के दौरान ऐसे किसानों के नाम पर फसल बिक्री दर्ज किए जाने के आरोप हैं, जिन्होंने कथित तौर पर मूंग की खेती ही नहीं की थी। मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कागजों में दिखाई गई मूंग की खेती
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी मूंग खरीदी के लिए कुछ कंप्यूटर ऑपरेटरों पर मिलीभगत कर फर्जी पंजीयन करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि किसानों के नाम, जमीन और अन्य विवरण का इस्तेमाल कर रिकॉर्ड में मूंग की फसल तैयार दिखाई गई और बाद में उसे सरकारी खरीदी केंद्र पर बेचने का रिकॉर्ड बनाया गया।आरोप है कि संबंधित किसानों ने वास्तविक तौर पर न तो मूंग की खेती की थी और न ही अपनी फसल सरकारी खरीदी केंद्र तक पहुंचाई थी। इसके बावजूद सरकारी दस्तावेजों में उनके नाम पर मूंग की बिक्री दर्ज कर दी गई।
बाजार से सस्ती मूंग खरीदकर MSP पर बिक्री का आरोप
कथित फर्जीवाड़े में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि बाजार से अपेक्षाकृत कम कीमत पर मूंग खरीदकर उसे सरकारी रिकॉर्ड में किसानों के नाम से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचा गया। इस प्रक्रिया के जरिए करीब 13.3 लाख रुपये का कथित मुनाफा कमाए जाने की बात सामने आई है।
किसानों को जानकारी मिली तो खुला मामला
मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब कुछ किसानों को पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उनकी जमीन और नाम का इस्तेमाल मूंग की बिक्री के लिए किया गया है। जानकारी सामने आने के बाद पूरे मामले को लेकर सवाल उठने लगे और जांच एजेंसियों का ध्यान इस ओर गया।
EOW ने दर्ज किया केस, अधिकारियों की भूमिका भी जांच में
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने मामले में आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फर्जी पंजीयन और सरकारी खरीदी की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही। मामले में सहकारिता विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित फर्जीवाड़े में कौन-कौन लोग शामिल थे और सरकारी रिकॉर्ड में कितनी मात्रा में फर्जी मूंग की बिक्री दिखाई गई।









