राजगढ़/खबर डिजिटल/ धर्मराज सिंह/ राजगढ़ में खेल और युवा कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। उत्कृष्ट विद्यालय परिसर स्थित बैडमिंटन हॉल में अभ्यास करने वाले खिलाड़ी विभाग की कथित लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं।
खिलाड़ियों का आरोप है कि कोर्ट का निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं किया गया, जिससे खेल प्रदर्शन प्रभावित होने के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
खिलाड़ियों के अनुसार बैडमिंटन कोर्ट में सीमेंट की फ्लोरिंग के ऊपर सीधे सिंथेटिक मैट बिछाई गई है, जबकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सिंथेटिक कोर्ट के नीचे वुडन बेस होना चाहिए। उनका कहना है कि हार्ड फ्लोर के कारण खेलते समय घुटनों और एड़ियों में दर्द होता है, जिससे उनकी गति और प्रदर्शन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
बच्चों से लेकर वरिष्ठ खिलाड़ियों तक का कहना है कि अन्य जिलों के बैडमिंटन कोर्ट में वुडन बेस पर सिंथेटिक फ्लोरिंग लगी हुई है, लेकिन राजगढ़ में ऐसा नहीं किया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि कोर्ट निर्माण के समय स्वीकृत तकनीकी मानकों का पालन हुआ या नहीं? यदि नहीं, तो जिम्मेदार कौन है?
खिलाड़ियों का यह भी आरोप है कि उन्होंने अपनी समस्या कई बार विभाग के अधिकारियों के सामने रखी। वहीं कोच मनी शर्मा और सीनियर कोच प्रकाश परमार ने भी इस मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या खेल और युवा कल्याण विभाग खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ समझौता कर रहा है? क्या निर्माण कार्य में अनियमितता या भ्रष्टाचार हुआ है? और यदि खिलाड़ियों के आरोप सही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई?
फिलहाल खिलाड़ी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि खेल सुविधाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप उपलब्ध कराई जा सकें और उभरती प्रतिभाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।









