डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडौरी, बजाग तहसील मुख्यालय में किराए के मकान में चल रहे जल संसाधन विभाग के दफ्तर पर मकान मालिक ने ताला जड़ दिया है। एक साल से किराया न मिलने के कारण मकान मालिक ने ये कदम उठाया है। खास बात यह है कि पिछला किराया चुकायें बगैर ही विभाग एक महीने पहले ही दफ्तर खाली कर तहसील भवन में चला गया। अब जरूरी सरकारी फाइलें और सामान उसी बंद भवन में फंसे हैं।
जानकारी के अनुसार जल संसाधन विभाग का अनुविभागीय कार्यालय साल 2016 से बजाग में एक निजी भवन में चल रहा था। विभाग और मकान मालिक के बीच किराए का करार था। मकान मालिक का आरोप है कि पिछले एक साल से विभाग ने किराया नहीं दिया। कई बार किराया मांगने पर भी भुगतान नहीं हुआ।
करीब एक महीने पहले विभाग ने अपना दफ्तर इस निजी भवन से हटाकर तहसील कार्यालय के एक कमरे में शिफ्ट कर दिया। मकान मालिक का कहना है कि विभाग ने भवन तो खाली कर दिया, पर एक साल का बकाया किराया अब तक नहीं दिया। इसी से नाराज होकर उन्होंने भवन के मुख्य दरवाजे पर ताला लगा दिया हैं।
मकान मालिक ने बताया कि भवन के अंदर अब भी विभाग की कई जरूरी फाइलें, रजिस्टर और सरकारी सामान रखा हुआ है। विभाग ने जल्दबाजी में दफ्तर शिफ्ट कर लिया ।अब ताला लगने से विभाग उन दस्तावेजों को नहीं निकाल पा रहा है। मकान मालिक ने इस मामले की शिकायत विभाग के बड़े अधिकारियों से भी की, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई ।
इधर तहसील भवन के जिस कमरे में जल संसाधन विभाग का नया दफ्तर खोला गया है, वहां भी हालत ठीक नहीं है। कमरे में लगा पंखा खराब है। गर्मी में कर्मचारियों को परेशानी हो रही है। साथ ही एसडीओ को छोड़कर बाकी कर्मचारी भी अक्सर दफ्तर से गायब रहते हैं।
इस मामले में जल संसाधन विभाग के एसडीओ राजकुमार अहिरवार का कहना है कि बकाया किराए की जानकारी उनके पास है। भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही मकान मालिक का बकाया किराया जमा कर दिया जाएगा। उसके बाद भवन से सामान हटा लिया जाएगा।
दूसरी तरफ मकान मालिक एक साल से अपने किराए के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि किराया मांगना उनका हक है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। मजबूरी में उन्हें ताला लगाना पड़ा। अब वे चाहते हैं कि विभाग जल्द से जल्द उनका बकाया पैसा दे ताकि मामला खत्म हो। फिलहाल विभाग की लापरवाही से मकान मालिक परेशान हैं और सरकारी कामकाज भी प्रभावित हो रहा है।









