रीवा/ अरविंद तिवारी/ खबर डिजिटल/ जिले की त्योंथर तहसील इन दिनों अवैध रेत उत्खनन का गढ़ बन चुकी है। यहाँ के बरुआ और डीह घाट पर रेत माफियाओं का आतंक इस कदर हावी है कि प्रशासन की नाक के नीचे दिन-दहाड़े बेलन और टमस नदियों का सीना छलनी किया जा रहा है। भारी मशीनों और नावों के जरिए बेखौफ होकर रेत निकाली जा रही है और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से इसका अवैध परिवहन धड़ल्ले से जारी है।
प्रशासनिक मौन और बढ़ता खतरा
हैरानी की बात यह है कि सब कुछ जानते हुए भी स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। स्थानीय नेता ललित मिश्रा ने इस पूरे मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यह केवल पर्यावरण की चोरी नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ है। मशीनों द्वारा नदी के तल को अनियंत्रित रूप से खोदने के कारण नदी का स्वरूप बिगड़ चुका है, जिससे आए दिन भूस्खलन की स्थिति बनी रहती है।
नदियां बनीं 'डेथ ट्रैप'
ललित मिश्रा ने इन अवैध गतिविधियों के कारण होने वाली मौतों को 'हत्या' करार दिया है। रेत के अंधाधुंध उत्खनन से नदी में अप्रत्याशित गहरे गड्ढे बन गए हैं। दैनिक कार्यों या नहाने के लिए नदी में उतरने वाले ग्रामीण अक्सर इन छिपे हुए काल के गाल में समा जाते हैं। मौतों का सिलसिला बढ़ने के बावजूद माफियाओं पर कोई ठोस कार्रवाई न होना शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। क्षेत्र में इस समय आक्रोश और भय का माहौल है।









