डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल डिंडौरी जिले के मेहदवानी विकासखंड से बुनियादी ढांचे के निर्माण में बरती जा रही लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। मेहदवानी से कुसेरा के बीच लगभग 4 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनी 12 किलोमीटर लंबी सड़क हाल ही में हुई तेज बारिश के पानी में बह गई। बारिश के दौरान जलस्तर बढ़ने से पुलिया के पास सड़क का एक बड़ा हिस्सा कटकर बह गया, जिससे मार्ग के बीचों-बीच खतरनाक और गहरा कटाव बन गया है। इस कटाव के कारण क्षेत्र का आवागमन पूरी तरह से प्रभावित हो गया है।
मामले से जुड़ी मुख्य जानकारियां
स्थान: धमनी/मेहदवानी से कुसेरा मार्ग, विकासखंड मेहदवानी (जिला डिंडौरी)
लागत व लंबाई: लगभग ₹4 करोड़ की लागत, 12 किमी सड़क
निर्माण एजेंसी: शिव शक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी (रीवा)
संबंधित विभाग: मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण
सड़क की उम्र: निर्माण पूर्ण हुए मात्र 3 वर्ष

घटिया सामग्री और जल निकासी मानकों की अनदेखी
ग्रामीणों का कहना है किमानकों की अनदेखी: सड़क और पुलिया के निर्माण के समय न तो पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग किया गया और न ही जल निकासी के सही इंतजाम किए गए। यदि निर्माण के समय इंजीनियरों और ठेकेदार ने तकनीकी मानकों का ध्यान रखा होता, तो महज तीन साल पुरानी सड़क बारिश के मामूली बहाव में इस तरह नेस्तनाबूद न होती। दैनिक जीवन प्रभावित: सड़क के क्षतिग्रस्त होने से कई गांवों के ग्रामीणों का जिला मुख्यालय और स्थानीय बाजारों से संपर्क कट गया है, जिससे रोजमर्रा के कामों और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है।
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की उठी मांग
घटना की जानकारी मिलते ही मेहदवानी जनपद क्षेत्र के प्रतिनिधि रामप्रसाद तेकाम ने तुरंत पूरे मामले से जिला प्रशासन को अवगत कराया है। उन्होंने सरकारी धन के दुरुपयोग और घटिया निर्माण को लेकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सड़क निर्माण और तकनीकी डिजाइन की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए।जांच में निर्माण संबंधी लापरवाही या घटिया सामग्री साबित होने पर शिव शक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए।लापरवाही बरतने वाले विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार पर जवाबदेही तय करते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जाए। फिलहाल, 3 साल के भीतर करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क के इस तरह जमींदोज हो जाने से लोक निर्माण और ग्रामीण विकास विभागों के दावों पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। अब हर किसी की नजरें जिला प्रशासन के रुख और आगामी जांच पर टिकी हैं।









