डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी, कहते हैं कि सरकारी कामों में कब क्या हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसा ही एक अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला डिंडौरी से सामने आया है। यहाँ एक सीवर प्रोजेक्ट को लेकर ऐसा घालमेल हुआ है कि देखने वाले भी हैरान हैं। जिस सीवर प्रोजेक्ट को अभी 5 दिन पहले ही प्रशासन ने 'नंबर वन' बताकर तारीफों के पुल बांधे थे, आज उसी प्रोजेक्ट पर भ्रष्टाचार और घटिया काम के गंभीर आरोप लग रहे हैं। मामला इतना बढ़ गया है कि नगर परिषद के नेताओं ने सीधे सूबे की प्रभारी मंत्री प्रतिमा बागरी को ज्ञापन सौंपकर इस पूरे मामले की हाई-लेवल जांच कराने की मांग कर दी है।
5 दिन में कैसे बदल गई तस्वीर?
पूरा मामला बेहद दिलचस्प और विरोधाभासी है। अभी बीते 10 जुलाई को जिला प्रशासन ने इस सीवर प्रोजेक्ट की खूब तारीफ की थी। उन्होंने बाकायदा काम करने वाली एजेंसी को 'उत्कृष्ट कार्य' के लिये प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया था। प्रशासन का दावा था कि इस प्रोजेक्ट की वजह से शहर के 8 बड़े नालों का गंदा पानी का नर्मदा नदी में जाने से रोक दिया गया है, जिससे नर्मदा जी साफ रहेगी। लेकिन प्रशासन की इस वाहवाही के ठीक 5 दिन बाद ही जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करने लगी। नगर परिषद के अध्यक्ष और पार्षदों ने इस काम को पूरी तरह से घटिया बताते हुए मोर्चा खोल दिया है।
नगर परिषद अध्यक्ष सुनीता अशोक सारस, उपाध्यक्ष सारिका मनीष नायक और अन्य पार्षदों का कहना है कि इस करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। उनके आरोप हैं कि सिर्फ कागजों पर ही काम हुआ हैं, जमीनी हकीकत कुछ और हैं । सीवर लाइन बिछाने में तय नियमों और तकनीकी मानकों का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा गया है।
शहर के कई वार्डों और मुख्य रास्तों पर सीवर पाइप लाइन को जितनी गहराई में डालना था, उतनी गहराई पर नहीं डाला गया। पाइपों का ढाल भी सही नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में सीवर का गंदा पानी आगे जाने के बजाय पीछे की तरफ फेंकने लगेगा और पूरी पाईप लाइन चोक हो जाएगी।
सीवर के पाइपों को आपस में ठीक से जोड़ा नहीं गया है। इससे गंदा पानी रिसकर जमीन के अंदर जा रहा है, जिससे जमीन का पीने वाला पानी भी दूषित हो सकता है। ठेकेदार ने सीवर लाइन डालने के लिए सड़कें तो खोद दीं, लेकिन काम खत्म होने के बाद उन्हें ठीक से सुधारा नहीं। जगह-जगह गड्ढे और मलबे के ढेर पड़े हैं, जिससे आए दिन लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं।
इस पूरे विवाद के बाद अब नगर परिषद के जनप्रतिनिधियों ने प्रभारी मंत्री से मांग की है कि किसी स्वतंत्र और एक्सपर्ट तकनीकी टीम से इस पूरे प्रोजेक्ट की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि अगर जांच में गड़बड़ी मिलती है, तो दोषी कंपनी से उसके खुद के खर्चे पर दोबारा सही तरीके से काम कराया जाए। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले पर क्या एक्शन लेती है और करोड़ों रुपये की लागत से बने इस सीवर सिस्टम की हकीकत जांच में क्या निकलकर सामने आती है।









