Jyotiraditya Scindia Congress: मध्य प्रदेश कांग्रेस के अंदर साल 2020 में कमलनाथ सरकार गिरने का जो जख्म लगा था, उसकी टीस आज छह साल बाद भी कितनी गहरी है, इसका एक बड़ा नजारा इंदौर में देखने को मिला। इंदौर के गांधी भवन में आयोजित कांग्रेस के कार्यकर्ता संवाद कार्यक्रम के दौरान पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय सिंह राहुल ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की वापसी को लेकर एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने सूबे के सियासी पारे को अचानक सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। अजय सिंह ने दो टूक शब्दों में पार्टी आलाकमान को भी चेतावनी भरे लहजे में अल्टीमेटम दे डाला है।
अजय सिंह का विस्फोटक जवाब
इंदौर में जब संवाद कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और मीडिया ने अजय सिंह राहुल से यह सवाल पूछा कि, यदि भविष्य में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो क्या बीजेपी में जा चुके नेताओं को वापस पार्टी में लिया जाएगा? इस सवाल पर अजय सिंह ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि अगर भविष्य में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार बनती है, तो हमें पार्टी पीठ में छुरा घोंपकर जाने वाले किसी भी गद्दार की बिल्कुल जरूरत नहीं होगी। हालांकि, कुछ सामान्य चुनावी समीकरणों और परिस्थितियों में कुछ छोटे नेताओं की घर-वापसी पर विचार संभव है।
सिंधिया आए तो मेरा कांग्रेस से इस्तीफा
माहौल तब पूरी तरह से गरमा गया जब बातचीत केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर पहुंची। सवाल पूछा गया कि अगर सिंधिया खुद वापस आना चाहें तो कांग्रेस का क्या स्टैंड होगा? इस पर अजय सिंह राहुल ने अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा कि अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया कभी भी कांग्रेस में वापस आने की कोशिश करते हैं, तो हम उन्हें किसी भी कीमत पर पार्टी में शामिल नहीं करेंगे। इसके बावजूद, अगर दिल्ली या केंद्रीय नेतृत्व उन्हें फिर से कांग्रेस में एंट्री देता है, तो मैं उसी क्षण कांग्रेस पार्टी से अपना इस्तीफा दे दूंगा। खास बात यह रही कि जब अजय सिंह मंच से यह बात कह रहे थे, तब वहां मौजूद कांग्रेस के प्रदेश मीडिया विभाग के केके मिश्रा ने भी उनकी इस बात का खुलकर समर्थन किया।
मार्च 2020 का वो दर्द…
आपको बता दें कि मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तत्कालीन कमलनाथ सरकार के खिलाफ बगावत करते हुए कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। उनके साथ उनके वफादार 22 विधायकों ने भी पाला बदला और BJP का दामन थाम लिया था। इस बगावत के चलते 15 महीने पुरानी कमलनाथ सरकार अल्पमत में आकर गिर गई थी और प्रदेश में फिर से शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा की सत्ता स्थापित हुई थी।
क्या कहते है जानकार?
राजनीतिक जानकारों की माने तो अजय सिंह राहुल का यह बयान सिर्फ एक व्यक्तिगत बयान नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस के उस कोर ग्रुप की आवाज है जो आज भी 2020 के उस दंश को भुला नहीं पाया है। यह बयान साफ करता है कि भविष्य में अगर कोई केंद्रीय नेतृत्व सिंधिया खेमे के प्रति नरम रुख अपनाने की सोचेगा भी, तो प्रदेश के बड़े कांग्रेस नेताओं को भारी विरोध और बगावत का सामना करना पड़ेगा।









