राकेश यादव, सिवनी। जिले के बंडोल वन परिक्षेत्र के अंतर्गत बसा मगरकठा गांव इन दिनों भयंकर दहशत के साये में जीने को मजबूर है। क्षेत्र में पिछले कई दिनों से एक खूंखार बाघ की लगातार मौजूदगी ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है। ताजा घटना में, बीती रात उक्त बाघ ने सीमावर्ती इलाके में स्थित एक ग्रामीण के पशुबाड़े को अपना निशाना बनाया। बाड़े के अंदर सुरक्षित बंधी चार मवेशियों (बकरियों) पर बाघ ने अचानक हमला बोल दिया और उन्हें मौत के घाट उतारते हुए अपना निवाला बना लिया।
सुबह होते ही जब पशुपालक और आसपास के ग्रामीणों ने बाड़े की यह स्थिति देखी, तो पूरे गांव में हड़कंप मच गया। इस सनसनीखेज घटना के बाद से स्थानीय रहवासियों के बीच भारी भय और आक्रोश का माहौल है।


एक हफ्ते से मंडरा रहा है खतरा
ग्रामीणों के मुताबिक, यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले लगभग एक सप्ताह से मगरकठा और उसके आसपास के जंगलों से लगे खेतों व रिहायशी इलाकों में बाघ की मूवमेंट लगातार देखी जा रही है। इससे पहले भी जंगली जानवरों द्वारा मवेशियों को नुकसान पहुंचाने की आशंका जताई जाती रही है, लेकिन इस बार बाघ के सीधे बाड़े के भीतर घुसकर मवेशियों का शिकार करने से पशुपालकों की चिंताएं कई गुना बढ़ गई हैं। किसानों और पशुपालकों का कहना है कि जब से बाघ ने गांवों की ओर रुख किया है, तब से खेतों में अकेले जाना या मवेशियों को चराने ले जाना भी खतरे से खाली नहीं रह गया है।
ग्रामीणों की वन विभाग से सख्त और तुरंत मांग
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय लोगों में वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते विभाग द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह जंगली जानवर किसी इंसानी जीवन को भी नुकसान पहुंचा सकता है। ग्रामीणों ने वन विभाग के सामने प्रमुख मांगें रखी हैं:
- तुरंत पिंजरा लगाया जाए: गांव के आसपास सुरक्षित स्थानों पर तुरंत पिंजरे की व्यवस्था की जाए ताकि बाघ को रेस्क्यू किया जा सके।
- रात्रिकालीन गश्त बढ़ाई जाए: वन विभाग के मैदानी अमले द्वारा क्षेत्र में नाइट पेट्रोलिंग (गश्त) को सघन किया जाए।
- उचित मुआवजा मिले: पीड़ित पशुपालक को शासन के नियमानुसार उसकी मृत बकरियों का पूरा और समय पर मुआवजा प्रदान किया जाए।







