श्योपुर/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में आदिवासी और अनुसूचित जाति के लोगों की जमीनों से जुड़े मामलों में सरकारी रिकॉर्ड को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान प्रशासन से सवाल किए हैं। अदालत के सामने पेश आंकड़ों में 151 मामलों का अंतर मिलने के बाद सरकारी रिकॉर्ड के संधारण और लंबित प्रकरणों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को हुई। इस दौरान सामने आया कि तत्कालीन कलेक्टर संजय कुमार ने 7 फरवरी 2024 को लिखे पत्र में जमीन से संबंधित 600 लंबित मामलों का उल्लेख किया था। वहीं, वर्तमान प्रशासन की ओर से पेश रिपोर्ट में पोर्टल पर केवल 449 मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई। दोनों आंकड़ों की तुलना करने पर 151 मामलों का अंतर सामने आया।
हाईकोर्ट ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
अदालत ने इस अंतर को लेकर प्रशासन से सवाल किया कि वर्तमान अधिकारियों ने पूर्व कलेक्टर से आंकड़ों के संबंध में स्पष्टीकरण क्यों नहीं मांगा। जब पहले के रिकॉर्ड में 600 लंबित मामलों का जिक्र था, तो मौजूदा रिपोर्ट में इनकी संख्या घटकर 449 कैसे रह गई? कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रिकॉर्ड में दर्ज और लंबित प्रकरणों की स्थिति स्पष्ट करने की आवश्यकता जताई।
क्या पोर्टल पर दर्ज नहीं किए गए कुछ मामले?
सुनवाई के दौरान अदालत ने आशंका जताई कि संभव है कि कुछ मामलों को पोर्टल पर दर्ज ही नहीं किया गया हो। ऐसी स्थिति में प्रभावशाली लोगों को फायदा मिलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, यह फिलहाल अदालत द्वारा जताई गई आशंका है। मामलों को जानबूझकर रिकॉर्ड से बाहर रखने या किसी को अनुचित लाभ पहुंचाने की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
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सरकार ने जांच के लिए मांगा समय
मामले में राज्य सरकार ने विस्तृत जांच कराने और उसके आधार पर नया जवाब पेश करने के लिए अदालत से समय मांगा है। अब प्रशासन को 600 और 449 मामलों के बीच सामने आए अंतर का कारण स्पष्ट करना होगा। साथ ही यह भी बताना होगा कि लंबित मामलों का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है और पोर्टल पर सभी प्रकरण दर्ज हैं या नहीं।
21 अक्टूबर को अगली सुनवाई
इस मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। अब सबकी नजर सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले नए जवाब और जांच के निष्कर्षों पर रहेगी। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 151 मामलों के अंतर की वजह क्या सामने आती है और जमीन से जुड़े इन प्रकरणों के रिकॉर्ड को लेकर प्रशासन अदालत को क्या जानकारी देता है।









