सीधी/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के सीधी जिले में वाहन चेकिंग के दौरान राज्य मंत्री राधा सिंह की बहन और पुलिसकर्मी के बीच विवाद का मामला सामने आया है। जिला पंचायत सदस्य पूजा सिंह कुशराम ने जमोड़ी थाना क्षेत्र में तैनात सहायक उपनिरीक्षक (ASI) रजनीश सिंह बघेल पर अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाए हैं। वहीं, पुलिसकर्मी का कहना है कि उन्होंने केवल सीट बेल्ट लगाने की समझाइश दी थी। घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वृद्धाश्रम में जन्मदिन मनाने जा रहे थे दंपती
जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार रात करीब 8 बजे पूजा सिंह कुशराम अपने पति के साथ सीधी स्थित वृद्धाश्रम में जन्मदिन मनाने जा रही थीं। इसी दौरान जमोड़ी थाना क्षेत्र के पास पुलिस वाहन चेकिंग कर रही थी। यहां ASI रजनीश सिंह बघेल ने दंपती को सीट बेल्ट लगाने की समझाइश दी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद होने की बात सामने आई है। घटना को लेकर पूजा सिंह ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पुलिसकर्मी के व्यवहार पर सवाल उठाए।
पूजा सिंह ने लगाए अभद्रता के आरोप
पूजा सिंह कुशराम का आरोप है कि वाहन चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मी ने उनके और उनके पति के साथ अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिसकर्मी ने पहले उनकी गाड़ी की नेमप्लेट देखी, जिस पर जिला पंचायत सदस्य और भाजपा से संबंधित जानकारी लिखी थी। पूजा सिंह के आरोपों के बाद मामला चर्चा में आ गया है। हालांकि, पुलिसकर्मी की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है और दोनों पक्षों के बयानों में अंतर है।
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ASI ने क्या कहा?
दूसरी ओर, ASI रजनीश सिंह बघेल के मुताबिक, उन्होंने वाहन में सवार लोगों को केवल सीट बेल्ट लगाने की समझाइश दी थी। उनका कहना है कि इस दौरान न तो चालान काटा गया और न ही कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई। फिलहाल, घटना को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के बीच मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सोशल मीडिया पर चर्चा, जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
राज्य मंत्री राधा सिंह की बहन और पुलिसकर्मी के बीच हुए इस विवाद ने जिले में चर्चा छेड़ दी है। एक ओर पूजा सिंह ने पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी ओर ASI ने कार्रवाई के बजाय केवल यातायात नियमों की समझाइश देने की बात कही है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष या विभागीय कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में दोनों पक्षों के आरोपों को जांच के आधार पर ही परखा जाना उचित होगा।









