ग्वालियर/खबर डिजिटल/ ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े मामले में नया विवाद सामने आया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी ने प्रस्तावित संपत्ति बंटवारे से संबंधित दस्तावेजों पर अपने हस्ताक्षर को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने दावा किया है कि दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर उनकी सहमति से नहीं, बल्कि धोखे से कराए गए थे। प्रतिमा देवी की ओर से अदालत में इस मामले में साक्ष्य दर्ज कराने की मांग की गई है। उनका पक्ष है कि बंटवारे से जुड़े दस्तावेजों में दर्ज हस्ताक्षरों की परिस्थितियों और उनकी वास्तविक सहमति को अदालत के सामने स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
सिंधिया परिवार की ओर से आपत्ति का विरोध
प्रतिमा देवी की आपत्ति का ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं ऊषा राजे, वसुंधरा राजे तथा यशोधरा राजे की ओर से विरोध किया गया है। परिवार की ओर से पेश वकीलों ने अदालत में दलील दी कि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर सहमति के साथ किए गए थे। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने के बाद परिवार के सदस्यों के बीच सामान्य पारिवारिक माहौल रहा। इस दौरान साथ में डिनर हुआ और फोटो शूट भी कराया गया था। वकीलों ने इन परिस्थितियों का हवाला देते हुए प्रतिमा देवी के आरोपों पर सवाल उठाए हैं।
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14 अक्टूबर को आएगा फैसला
मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायालय में चल रही है। दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी हो चुकी है। अब अदालत ने प्रतिमा देवी की आपत्ति और साक्ष्य दर्ज कराने की मांग पर फैसला सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है। अदालत के आगामी निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि प्रतिमा देवी की ओर से उठाई गई आपत्ति पर साक्ष्य दर्ज कराने की अनुमति दी जाती है या नहीं। इस फैसले पर सिंधिया परिवार की संपत्ति से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद में आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा भी तय हो सकती है।
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