भोपाल/खबर डिजिटल/ निर्वाचन आयोग ने SIR के नाम पर देश को धोखा दिया है। SIR में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम कटने का एक प्रमुख कारण 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग करना था। यह बात मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कही।
चुनाव आयोग पर लीपापोती करने का लगा आरोप
कमलनाथ ने कहा कि हमारे नेता राहुल गांधी की तरफ़ से आयोग की बेईमानी उजागर करने के बाद आयोग लीपापोती करने की कोशिश कर रहा है। अब आयोग ने विशेष अभियान में यह बंदिश हटा ली है। इससे स्पष्ट है कि यह बंदिश जानबूझकर सत्ताधारी दल को फायदा पहुंचाने के लिए मतदाताओं के नाम काटने के लिए लगाई गई थी।
इसके अलावा रोजगार और अन्य कारणों से देश के अलग-अलग स्थानों को पलायन करने वालों, जिनमें बड़ी संख्या में वंचित समुदाय के लोग थे, उन्हें भी SIR से परेशानी हुई। इसका बहुत बड़ा कष्ट हमारी बहनों को झेलना पड़ा जो विवाह के बाद अपने ससुराल आ गयीं।
कमलनाथ ने छिंदवाड़ा के नागरिकों से की अपील
कमलनाथ ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कहा कि मैं प्रदेश और छिंदवाड़ा के नागरिकों से आग्रह करता हूँ कि 10 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में अपने नाम मतदाता सूची में जुड़वाएँ। इसके साथ यह भी स्पष्ट करना चाहता हूँ कि जब तक चुनाव आयोग दिल्ली के अपने कंप्यूटर से मनमाने तरीक़े से नाम जोड़ता और घटाता रहेगा तब तक वोटर लिस्ट पूर्ण पारदर्शी नहीं बनेगी।
इसी तरह फॉर्म 7 का दुरुपयोग कर जिस बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, वह भी घोर अपराध है। अपनी एकाध गलती मानकर आयोग के कर्ताधर्ता अपने गुनाहों से बच नहीं सकते। जब तक देश के एक-एक मतदाता को उसका हक नहीं मिल जाता तब तक हर स्तर पर संघर्ष जारी रहेगा।









