Cabinet Expansion: छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में इन दिनों राजनीतिक उठापटक के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का दिल्ली दौरा राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव की भूमिका तय करता नजर आ रहा है। सत्ता के गलियारों और राजनैतिक विश्लेषकों के बीच इस दौरे को महज एक औपचारिक या शिष्टाचार भेंट नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे साय कैबिनेट में होने वाले संभावित फेरबदल के तौर पर देखा जा रहा है।
अमित शाह से होगा मंथन
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित कई बड़े नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठक हो सकती है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी तक मंत्रिमंडल विस्तार या बदलाव को लेकर कोई बयाना सामने नही आया है, लेकिन पिछले कई हफ्तों से बदलावों की सुगबुगाहट बनी हुई है।
सीएम बोले, इंतजार कीजिए…
इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब हाल ही में रायपुर में मीडियाकर्मियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर सवाल दागा था। संवेदनशील सवालों को टालने वाले मुख्यमंत्री ने इस बार साफ तौर पर इनकार नहीं किया। उन्होंने चेहरे पर मुस्कान के साथ केवल इंतजार कीजिए कहकर बात को टाल दिया। मुख्यमंत्री के इस रहस्यमयी जवाब के बाद से ही सूबे के विधायकों, मंत्रियों और दावेदारों की धड़कनें तेज हो गई हैं और अटकलों को बल मिला है।
क्या कहते है जानकार?
राजनैतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अब 2028 में होने वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव की बिसात बिछाने में जुट गया है। बस्तर से लेकर सरगुजा और मैदानी इलाकों के समीकरणों को साधने के लिए कुछ नए चेहरो को मौका मिल सकता है। वर्तमान साय सरकार के मंत्रियों के कामकाज का जो रिपोर्ट कार्ड तैयार हुआ है, उसके आधार पर कुछ कप्तानों की छुट्टी की जा सकती है। बता दें कि छत्तीसगढ़ में कैबिनेट मंत्रियों की संख्या अपनी तय सीमा के बिल्कुल करीब है, इसलिए नए चेहरों को शामिल करने के लिए पुराने मंत्रियों को हटाना या उनके विभागों को बदलना ही एकमात्र रास्ता बचा है।
संगठन में भी बदलाव की आहट
सूत्रों का यह भी कहना है कि केवल कैबिनेट ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन में भी जल्द ही कुछ नियुक्तियां और फेरबदल देखने को मिल सकते हैं। इसके तहत कैबिनेट से हटाए जाने वाले कुछ चेहरों को संगठन में बड़ी और महत्वपूर्ण कमान सौंपी जा सकती है। अब छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक सबकी निगाहें आलाकमान के दरबार में होने वाली बैठकों पर टिक गई हैं।









