MP Farmer: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने प्रदेश की आर्थिक रफ्तार को दोगुना करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने 5 लाख करोड़ रुपये की वार्षिक साख योजना को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इस योजना के तहत सबसे बड़ा तोहफा मध्य प्रदेश के अन्नदाताओं को मिला है, जिनके लिए लोन के रास्ते पूरी तरह खोल दिए गए हैं।
मुख्य सचिव का आदेश
मंत्रालय में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल बैठक के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने वित्त विभाग और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के आला अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने साफ किया है कि सभी जिलों के क्रेडिट प्लान का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता और कड़ाई के साथ होना चाहिए। बैंकिंग सिस्टम और जिला प्रशासन के बीच सटीक तालमेल से ही राज्य की आर्थिक गतिविधियों को जमीनी स्तर पर गति दी जा सकती है।
अन्नदाताओं के लिए 1.65 लाख करोड़
सरकार ने खेती-किसानी की लागत को कम करने और उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र के ऋण लक्ष्यों में बड़ा इजाफा किया है।
लाभकुल कृषि ऋण: 1,65,117 करोड़, किसानों को कर्ज के बोझ से बचाना और आत्मनिर्भर बनाना।
विशेष फसल ऋण: 88,638 करोड़, बोनी और खेती के अन्य कामों के लिए समय पर खाद-बीज हेतु वित्तीय मदद।
MSME और रिन्यूएबल एनर्जी
मंत्रालय की बैठक में वार्षिक साख योजना 2026-27 का औपचारिक विमोचन भी किया गया। जिसमें बड़े लक्ष्य तय किए गए। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए सरकार ने 1,62,967 करोड़ रुपये का ऋण लक्ष्य रखा है, जिससे नए स्टार्टअप और स्थानीय उद्योगों को संजीवनी मिलेगी। स्वच्छ भारत और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सौर ऊर्जा व अन्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भी लोन के बजट में बड़ी बढ़ोतरी की गई है।
बैठक में रहे मौजूद
इस अहम वित्तीय बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड और भारतीय स्टेट बैंक समेत तमाम प्रमुख बैंकिंग संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। सरकार को भरोसा है कि बैंकों के इस बड़े सहयोग से एमपी में निवेश और रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।









