ट्रेन में कन्फर्म टिकट होने के बाद भी अगर यात्री को अपनी आरक्षित सीट नहीं मिले, तो अब इसे सामान्य असुविधा नहीं माना जाएगा. केरल में सामने आए एक मामले में उपभोक्ता आयोग ने भारतीय रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए एक यात्री के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. आयोग ने रेलवे को सेवा में लापरवाही का दोषी मानते हुए पीड़ित यात्री को 50 हजार रुपये मुआवजा और 3 हजार रुपये मुकदमे का खर्च देने का निर्देश दिया है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला उस यात्री से जुड़ा है जिसने बेंगलुरु से कोचुवेली जाने के लिए तत्काल कोटे से कन्फर्म टिकट खरीदा था. यात्रा शुरू होने पर उसे उम्मीद थी कि वह अपनी आरक्षित सीट पर आराम से सफर करेगा, लेकिन कोच में पहुंचते ही स्थिति बिल्कुल अलग मिली. रिजर्व कोच में बड़ी संख्या में अनारक्षित यात्री मौजूद थे, जिसके कारण वहां खड़े होने तक की जगह नहीं बची थी. हालात ऐसे बन गए कि यात्री पूरी रात अपनी सीट पर बैठ भी नहीं सका और भीड़ के बीच खड़े-खड़े सफर पूरा करना पड़ा.
यात्री ने समस्या का समाधान कराने के लिए रेलवे के कस्टमर केयर से संपर्क किया, लेकिन उसे त्योहारों के दौरान अधिक भीड़ होने का कारण बताकर इंतजार करने की सलाह दी +ग++झा कीं. बावजूद इसके किसी अधिकारी की ओर से तत्काल कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई. भीड़ इतनी ज्यादा थी कि कोच के अंदर आवाजाही करना भी मुश्किल हो गया था और यात्री पूरी रात आराम नहीं कर पाया.
जब मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा तो रेलवे ने अपने बचाव में कहा कि पूजा और नवरात्रि के दौरान यात्रियों की संख्या सामान्य से अधिक थी. रेलवे का दावा था कि शिकायत मिलने के बाद टीटीई ने रेलवे सुरक्षा बल की मदद से अगले स्टेशन पर अनारक्षित यात्रियों को कोच से बाहर कर दिया था. हालांकि आयोग ने कहा कि रेलवे अपने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका.
आयोग ने उपलब्ध तस्वीरों, सोशल मीडिया पर की गई शिकायत और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि रेलवे यात्रियों को उनकी आरक्षित सीट उपलब्ध कराने में विफल रहा. इसी आधार पर दक्षिणी रेलवे, दक्षिण पश्चिमी रेलवे और तिरुवनंतपुरम के अतिरिक्त मंडल रेल प्रबंधक को संयुक्त रूप से एक महीने के भीतर 50 हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना के लिए और 3 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया गया. यह फैसला यात्रियों के अधिकारों की रक्षा और रेलवे की जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.









