Transport Service Launch in MP: राजधानी भोपाल से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा-पीएम ई-बस सेवा' का को हरीझंडी दिखाकर रवाना किया। मंत्री नितिन गडकरी ने संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश से ई-बस की शुरुआत हो रही है, यह तो सिर्फ न्यूज रील है असली फिल्म शुरू होना अभी बाकी है।
राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि मैं बीओटी मॉडल का जन्मदाता हूं, मेरे पास पैसे की कमी नहीं है। समस्या पैसा नहीं, पैसा खर्च न होना है। मैं ऐसा मॉडल बना दूंगा कि एमपी 25,000 बसें बिना पैसे के खरीद लेगा, जनता भी घूमेगी और सरकार को टैक्स भी मिलेगा। मध्यप्रदेश के कोने-कोने में ऐसी ई बस में गरीब, आदिवासी, मजदूर, किसान घूमेगा ।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सीएम मोहन यादव की तारीफ की
मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार का धन्यवाद देता हू कि इलेक्ट्रिक बसों के नवाचार के साथ शुरू की गई बस सेवा से राज्य के ग्रामीण और गरीबों को सुरक्षित, किफायती एवं जवाबदेही परिवहन की सुविधा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि अभी देशभर में 4 करोड़ फोर व्हीलर और 20 करोड़ टू-व्हीलर में यह फ्लूड डाला जा रहा है। एक रिपोर्ट में सामने आया है कि इथेनॉल के इस्तेमाल से वाहन को नुकसान नहीं होता, बल्कि गाड़ी का एवरेज भी बढ़ा है। देश का किसान अब अन्नदाता से ऊर्जादाता भी बना है।
केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि देश में 22 लाख करोड़ रुपए का पेट्रोल-डीजल और गैस आयात होता है। इलेक्ट्रिक बसें चलने से ये पैसा बचेगा और किसानों को मिलेगा। अब देश में 22 लाख करोड़ का पेट्रोल-डीजल आयात नहीं करना पड़ेगा। देश के किसान मक्के से इथेनॉल तैयार करेंगे और प्रदूषण का स्तर घटेगा।
अब मध्यप्रदेश में इलेक्ट्रिस बस और इलेक्ट्रिक ट्रक तैयार हो रही हैं। हम चाहते हैं कि इन बसों का किराया डीजल बसों की तुलना में 30 प्रतिशत कम हो। पीएम ई-बस सेवा स्कीम में 10 हजार बसें चलाई जानी हैं, जिसकी लागत 57 हजार करोड़ रुपए है। केंद्र सरकार 20 हजार करोड़ का सहयोग प्रदान कर रही है।
मध्यप्रदेश को 972 पीएम-ई बसें मिली हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में 25 हजार इलेक्ट्रिक एसी बसें चलाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में अभी 8 व्हीकल स्क्रैपिंग सेंटर हैं,अभी 21 और शुरू करने की आवश्यकता है। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा।
प्रदेश में 6 और ऑपरेशनल टेस्टिंग सेंटर खोलने के लिए हमने स्वीकृति दी है। प्रदेश में 22 लाख ड्राइवरों की कमी है। प्रदेश में 29 ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर स्वीकृत हैं। अब 61 सेंटर और दिए जा रहे हैं। पिछड़े जिलों में ड्रायवर ट्रेनिंग सेंटर और स्क्रैपिंग सेंटर खोलने की आवश्यकता है।







