उज्जैन/खबर डिजिटल/ महाकाल लोक क्षेत्र में संचालित शासकीय सराफा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को शहर से करीब 6 किलोमीटर दूर दाऊदखेड़ी गांव में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को लेकर छात्राओं में नाराजगी बढ़ गई है। शुक्रवार को 200 से अधिक छात्राएं कलेक्ट्रेट पहुंचीं और स्कूल को दूसरी जगह शिफ्ट किए जाने के विरोध में कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गईं।
छात्राओं ने जाहिर की पीड़ा
छात्राओं का कहना है कि स्कूल को दाऊदखेड़ी ले जाने से उन्हें रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे आवागमन के साथ-साथ परिवहन और सुरक्षा से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं। छात्राओं ने आशंका जताई कि दूर स्कूल होने के कारण कई छात्राओं के लिए नियमित रूप से वहां पहुंचना मुश्किल होगा, जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ सकता है।
मांग रखते हुए भावुक हुईं छात्राएं
प्रदर्शन के दौरान कई छात्राएं अपनी मांगों को लेकर भावुक हो गईं और रोने लगीं। उन्होंने प्रशासन से स्पष्ट रूप से मांग की कि स्कूल को वर्तमान स्थान से कहीं और स्थानांतरित न किया जाए। छात्राओं का धरना करीब चार घंटे तक चला। शुरुआत में जब कोई वरिष्ठ अधिकारी उनसे बातचीत के लिए मौके पर नहीं पहुंचा तो छात्राओं में नाराजगी और बढ़ गई।
लिखित आश्वासन के बाद समाप्त हुआ धरना
बाद में जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्र खत्री कलेक्ट्रेट पहुंचे और छात्राओं से बातचीत की। छात्राओं ने केवल मौखिक आश्वासन स्वीकार करने से इनकार करते हुए लिखित आश्वासन की मांग रखी। इसके बाद शिक्षा विभाग की ओर से लिखित रूप में भरोसा दिलाया गया कि अभिभावकों की बैठक आयोजित कर उनकी सहमति लिए बिना स्कूल को दूसरी जगह स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। लिखित आश्वासन मिलने के बाद छात्राओं ने अपना धरना समाप्त कर दिया। अब स्कूल के भविष्य को लेकर प्रशासन की आगामी बैठक और अभिभावकों की राय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस विधायक भी समर्थन में पहुंचे
छात्राओं के प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय कांग्रेस विधायक महेश परमार भी पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से छात्राओं की समस्याओं को गंभीरता से लेने और स्कूल शिफ्टिंग की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने की मांग की।
फिलहाल प्रशासन ने अभिभावकों की सहमति के बिना स्कूल को स्थानांतरित नहीं करने का लिखित आश्वासन दिया है। ऐसे में आगामी बैठक में क्या फैसला लिया जाता है, इस पर छात्राओं, अभिभावकों और स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।









