भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ आरक्षण के मुद्दे पर मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लोग जब तक स्वयं आगे आकर यह नहीं कहते कि अब उन्हें आरक्षण की जरूरत नहीं है, तब तक आरक्षण की व्यवस्था जारी रहनी चाहिए। इसके लिए चाहे कितना भी समय क्यों न लग जाए। उमा भारती के मुताबिक, आरक्षण में किसी तरह का बदलाव या सुधार तभी उचित होगा, जब SC और ST समुदाय के लोग इतनी बड़ी संख्या में सामान्य वर्ग की सीटों से चुनाव जीतने लगें, कि उन्हें स्वयं यह महसूस हो कि अब आरक्षण की आवश्यकता नहीं है।
‘आरक्षण खत्म करने का फैसला खुद समुदाय की सहमति से हो’
उमा भारती ने अपने बयान के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि आरक्षण व्यवस्था के भविष्य पर फैसला केवल राजनीतिक या सामाजिक दबाव के आधार पर नहीं होना चाहिए। जिन समुदायों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है, उनकी सामाजिक और राजनीतिक स्थिति तथा उनकी इच्छा को भी इसमें महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए। उनके मुताबिक, जब SC और ST समुदाय के लोग सामान्य सीटों पर बड़ी संख्या में चुनाव जीतने लगेंगे और स्वयं यह कहेंगे कि उन्हें अब आरक्षण की जरूरत नहीं है, तब इस व्यवस्था में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
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सरकारी स्कूलों को लेकर भी पहले रख चुकी हैं अपनी राय
उमा भारती इससे पहले भी सामाजिक समानता और आरक्षण को लेकर अपनी राय जाहिर कर चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि जब तक देश के शीर्ष संवैधानिक और राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों के परिवारों के बच्चे आम नागरिकों के बच्चों के साथ सामान्य सरकारी स्कूलों में शिक्षा हासिल नहीं करेंगे, तब तक समाज में समानता लाना चुनौतीपूर्ण रहेगा। उमा भारती का तर्क रहा है कि देश में सामाजिक और आर्थिक असमानता पूरी तरह समाप्त होने तक वंचित वर्गों को संरक्षण देने वाली व्यवस्थाओं की जरूरत बनी रह सकती है। उनके अनुसार, जब समाज के सभी वर्गों को शिक्षा और अवसरों में वास्तविक समानता हासिल होगी, तभी आरक्षण जैसी व्यवस्थाओं की आवश्यकता को लेकर व्यापक स्तर पर विचार किया जा सकेगा।
आरक्षण पर फिर तेज हो सकती है राजनीतिक बहस
उमा भारती का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब आरक्षण को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस लगातार जारी है। उनके बयान में आरक्षण को तत्काल समाप्त करने के बजाय सामाजिक समानता और प्रतिनिधित्व को इसके भविष्य से जोड़कर देखने की बात कही गई है। उनके मुताबिक, आरक्षण में बदलाव का रास्ता तभी खुलना चाहिए, जब SC और ST समुदाय खुद इस दिशा में आगे आएं और बिना आरक्षण के सामान्य सीटों पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व हासिल करने की स्थिति में हों। उमा भारती के इस बयान के बाद आरक्षण के मुद्दे पर मध्यप्रदेश समेत देश की राजनीति में एक बार फिर चर्चा तेज होने की संभावना है।







