MP Politics: मध्यप्रदेश भाजपा संगठन में नियुक्तियों की घोषणा होते ही संगठन के अंदर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आना शुरू हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल द्वारा जारी की गई 147 नामों की सूची में जहां स्थापित और रसूखदार नेताओं को एडजस्ट कर दिया गया है, वहीं बरसों से उम्मीद पाले बैठे जमीनी कार्यकर्ताओं और नेताओं को तगड़ा झटका लगा है। विशेष रूप से मालवा के सबसे मजबूत गढ़ मंदसौर-नीमच संसदीय क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की पूरी तरह से उपेक्षा किए जाने के बाद पार्टी के अंदर निराशा देखी जाने लगी है।
निर्वाचित चेहरों को तवज्जो
मंदसौर-नीमच-जावरा संसदीय क्षेत्र में आने वाली 8 विधानसभा सीटों में से 7 सीटों पर वर्तमान में भाजपा का कब्जा है। इसके बावजूद 106 सदस्यों वाली प्रदेश कार्यसमिति में इस पूरे क्षेत्र से एक भी आम कार्यकर्ता या स्थानीय पदाधिकारी को जगह नहीं मिली है। इस क्षेत्र से संगठन ने केवल 3 निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को ही सूची में शामिल किया है, जिनमें उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, जावरा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय और जावद विधायक ओमप्रकाश सखलेचा शामिल हैं। यानी नई सूची से आम कार्यकर्ताओं के नाम पूरी तरह गायब कर दिए हैं।
पिछली कार्यकारिणी VS नई सूची
बता दें कि पूर्व की प्रदेश कार्यकारिणी में इस संसदीय क्षेत्र से आधा दर्जन जमीनी नेताओं को शामिल किया गया था, लेकिन इस बार आंकड़ा शून्य होने से महिला और पुरुष कार्यकर्ताओं के चेहरे से मुस्कान गायब है।
बुजुर्ग नेताओं की वापसी
एक तरफ जहां कार्यसमिति को लेकर असंतोष है, वहीं दूसरी तरफ हेमंत खंडेलवाल ने 41 नामों वाली प्रदेश स्थायी समिति में पार्टी के कुछ सीनियर और मार्गदर्शक नेताओं को शामिल कर संतुलन साधने की कोशिश की है। स्थायी समिति में पूर्व गृहमंत्री कैलाश चावला, पूर्व राज्यसभा सांसद रघुनंदन शर्मा, पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी और कद्दावर नेता तपन भौमिक जैसे चेहरों को जगह दी गई है।
महा-बैठक की तैयारी
कुल 147 नामों की इस लिस्ट में सभी संभाग प्रभारी, जिलों के प्रभारी, मोर्चों के प्रदेश अध्यक्ष और प्रकोष्ठों के प्रदेश संयोजकों को भी स्थायी आमंत्रित सदस्य की कमान सौंपी गई है। सूत्रों की मानें तो 24 जून को इस नवीन कार्यसमिति की पहली हाई-लेवल बैठक भोपाल में हो सकती है।
नेताओं का मौन आत्मसमर्पण!
इस अनदेखी के बाद जब मालवा अंचल के योग्य वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक मांगा गया, तो संगठन के कड़े अनुशासन के खौफ के चलते किसी ने भी खुलेआम कोई टिप्पणी नहीं की। हालांकि नेताओं का दबी जुबान कहना है कि यह संगठन अध्यक्ष का निर्णय है, सभी नियुक्त नेताओं को हमारी बधाई। नाम न उजागर करने की शर्त पर कई वरिष्ठ महिला और पुरुष कार्यकर्ताओं ने अपना दुःख व्यक्त किया है। कुल मिलाकर भाजपा की नई सूची आते ही प्रदेश भाजपा में बवाल होना शुरू हो गया है।









