कान्हीवाड़ा/खबर डिजिटल/ संतोष वन्देवार/ सिविल अस्पताल के अंतर्गत आने वाले उप स्वास्थ्य केंद्र घड़गोंदी में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 26 वर्षीय महिला को स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में गर्भवती दर्ज कर दिया गया, जबकि बाद में हुई जांच में उसके गर्भवती न होने की पुष्टि हुई। घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड संधारण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, संबंधित महिला का प्रेग्नेंसी पंजीयन किया गया, मातृ स्वास्थ्य कार्ड बनाया गया तथा उसे गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं के तहत टीकाकरण और आयरन की गोलियां भी प्रदान की गईं। इतना ही नहीं, विभागीय रिकॉर्ड में उसकी नियमित निगरानी भी दर्ज की जाती रही।
स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही का मामला
बताया जा रहा है कि पूर्व में भी इसी तरह की त्रुटि सामने आ चुकी थी। इसके बावजूद 8 मई 2026 को महिला को पुनः तीन माह की गर्भवती के रूप में दर्ज कर लिया गया।
मामले का खुलासा तब हुआ जब महिला ने अतिरिक्त चिकित्सकीय जांच कराई। जांच रिपोर्ट में गर्भधारण न होने की जानकारी सामने आने के बाद पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठने लगे।
खबर डिजिटल के संवाददाता द्वारा पूछे जाने पर संबंधित बीएमओ ने प्रारंभिक रूप से मेडिकल किट में तकनीकी खराबी को त्रुटि का कारण बताया। हालांकि सवाल यह उठता है कि यदि जांच किट में समस्या थी, तो बिना पुष्टि के प्रेग्नेंसी पंजीयन, स्वास्थ्य रिकॉर्ड अपडेट करने और अन्य प्रक्रियाएं कैसे पूरी कर दी गईं।
प्रेग्नेंसी टेस्ट में गड़बड़ी का मामला
यह मामला केवल एक महिला तक सीमित नहीं है, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन, डेटा की विश्वसनीयता और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। यदि रिकॉर्ड में इस प्रकार की त्रुटियां हो रही हैं, तो सरकारी आंकड़ों की सटीकता और योजनाओं के वास्तविक लाभार्थियों की पहचान पर भी असर पड़ सकता है।
अब आवश्यकता इस बात की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और स्वास्थ्य सेवाओं पर आमजन का विश्वास बना रहे।









