डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ जिले के बजाग जनपद अंतर्गत करौंदा गांव में पानी के भीषण संकट से परेशान होकर और बूँद - बूँद पानी को तरसी ग्रामीण महिलाओं का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। रविवार को भीषण गर्मी में बड़ी संख्या में महिलाओं ने खाली बर्तन लेकर जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे सड़क पर बाईक और खाली बर्तन रखकर चक्काजाम कर दिया। चिलचिलाती धूप में हुए इस प्रदर्शन के कारण हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी लाईन लग गईं।
प्रदर्शन कर रही महिलाओं का आरोप है कि गांव में 'नल-जल योजना' होने के बावजूद पिछले एक हफ्ते से उन्हें बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। पानी के लिए उन्हें दिन-रात भटकना पड़ता है, कई किलोमीटर पैदल चल कर पानी लाना पड़ता है। लेकिन स्थानीय सरपंच और सचिव इस गंभीर समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
यह घटना प्रदेश में चल रहे 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के दावों की पोल खोलती है। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ अधिकारी कागजों और सोशल मीडिया पर फोटो खिंचवाकर अभियान को सफल बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ जमीन पर कुएं सूखे पड़े हैं और हैंडपंप महीनों से बंद हैं।
जाम की सूचना मिलते ही पुलिस बल, नायब तहसीलदार और पीएचई विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पीएचई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी खराबी के कारण नए नलकूप का खनन समय पर नहीं हो सका। प्रशासन ने एक सप्ताह के भीतर समस्या का समाधान करने और तब तक के लिए पानी की वैकल्पिक व्यवस्था कराने के आश्वासन के बाद ही ग्रामीणों को समझाकर जाम खुलवाया गया।









