डेस्क। ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मध्यप्रदेश के सागर की जूडो खिलाड़ी यामिनी मौर्य ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उनके इस पदक के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या 20 पहुंच गई। यामिनी की इस उपलब्धि से पूरे मध्यप्रदेश में खुशी का माहौल है।
समर कैंप से शुरू हुआ था सफर
यामिनी मौर्य सागर जिले के एक साधारण किसान परिवार से हैं। उनके पिता हरिओम मौर्य खेती करते हैं। बचपन से ही यामिनी की रुचि खेलों में थी। वर्ष 2012 में उन्होंने एक समर कैंप में हिस्सा लिया, जहां पहली बार जूडो की ट्रेनिंग शुरू की।
उनके कोच दीपक रजक ने उनकी प्रतिभा को पहचानकर परिवार को नियमित प्रशिक्षण दिलाने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में आर्थिक स्थिति और पारिवारिक सोच के कारण परिवार तैयार नहीं था, लेकिन बाद में उन्होंने यामिनी का पूरा साथ दिया।
चोट से नहीं टूटा हौसला, मेहनत से जीता सिल्वर मेडल
साल 2017 में एक प्रतियोगिता के दौरान यामिनी का पैर टूट गया था। इस गंभीर चोट की वजह से उन्हें करीब एक साल तक खेल से दूर रहना पड़ा।
स्वस्थ होने के बाद उन्होंने दोबारा अभ्यास शुरू किया और लगातार मेहनत करती रहीं। इसी मेहनत का नतीजा है कि आज उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया।
दो बार की नेशनल चैंपियन, कई गोल्ड भी जीते
यामिनी इससे पहले भी कई बड़ी प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं। उन्होंने 2022 के राष्ट्रीय खेलों में गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद 2025 के हांगकांग एशियन ओपन और 2026 के डकार अफ्रीका ओपन में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
वह दो बार सीनियर नेशनल चैंपियन रह चुकी हैं और 2022 से लगातार भारतीय टीम का हिस्सा हैं। उनकी खास बात यह है कि उन्होंने अपने 57 किलोग्राम वजन वर्ग को लगातार बनाए रखा है, जो किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता।
सागर से लेकर पूरे मध्यप्रदेश में जश्न,
यामिनी की जीत के बाद उनके परिवार और पूरे सागर जिले में खुशी का माहौल है। उनके चाचा श्रीनाथ मौर्य ने बताया कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने यामिनी का साथ दिया और आज उनकी मेहनत रंग लाई है।
वहीं, उनकी पूर्व कोच मोनिका पारोची का कहना है कि यामिनी शुरू से ही अनुशासित और मेहनती खिलाड़ी रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यामिनी आने वाले ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी और देश के लिए पदक जीतने की क्षमता रखती हैं।
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