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देश को मिला पहला सहकारी विश्वविद्यालय, इफको ने बताया ‘ऐतिहासिक कदम’

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krishna kant

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देश को मिला पहला सहकारी विश्वविद्यालय, इफको ने बताया ‘ऐतिहासिक कदम’

नई दिल्ली: भारत की शीर्ष सहकारी संस्था इफको ने लोकसभा में पारित त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक 2025 का स्वागत करते हुए इसे "ग्रामिण भारत के लिए एक क्रांतिकारी पहल" बताया है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना देश में सहकारिता शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का काम करेगी।

क्यों खास है ये विश्वविद्यालय?

  • यह देश का पहला विश्वविद्यालय होगा जो पूरी तरह सहकारी क्षेत्र को समर्पित होगा।
  • इसका फोकस रहेगा – रोजगार सृजन, उद्यमिता को बढ़ावा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना।
  • "सहकार से समृद्धि" के विज़न को जमीन पर उतारने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।

अमित शाह बोले – "सहकारिता को मिलेगा नया नेतृत्व"

गृह और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने विधेयक की घोषणा करते हुए कहा,
"स्वतंत्रता के 75 वर्षों में पहली बार भारत को अपना सहकारी विश्वविद्यालय मिल रहा है। यह संस्था स्वरोजगार, स्टार्टअप्स, सामाजिक समावेशन और ग्रामीण विकास को गति देगी।"

उन्होंने विश्वास जताया कि यह विश्वविद्यालय हर साल लगभग 8 लाख छात्रों को डिप्लोमा, डिग्री और सर्टिफिकेट कोर्सेस के माध्यम से प्रशिक्षित करेगा।

इफको का बड़ा बयान – गांवों में आएगी नई जान

इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने इस विधेयक को "ऐतिहासिक और दूरदर्शी" करार दिया।
"यह पहल सहकारी संस्थानों के लिए एक नई क्रांति का आगाज है। इससे हमारे गांव और किसान मजबूत होंगे।"

उन्होंने बताया कि यह विश्वविद्यालय देशभर में विषय-विशेष सहकारी स्कूलों के निर्माण में भी मदद करेगा और इससे उर्वरक सहकारी प्रबंधन, विपणन और नेतृत्व के क्षेत्र में नई पीढ़ी तैयार की जाएगी।

इफको अध्यक्ष की भावुक प्रतिक्रिया

श्री दिलीप सांघानी, अध्यक्ष, इफको ने कहा,
"यह विश्वविद्यालय सहकारी भावना को जीवित रखेगा और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएगा। यह केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि सहकारिता के लिए भविष्य की प्रयोगशाला होगा।"

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत की गूंज

अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (ICA) के महानिदेशक जेरोएन डगलस ने इस फैसले को "विश्व भर में सहकारी आंदोलन के लिए प्रेरणा" बताया और कहा कि
"यह न केवल भारत बल्कि वैश्विक सहकारी संस्कृति के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है।"

उन्होंने इस पहल की घोषणा को संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 'अंतरराष्ट्रीय सहकारी वर्ष' में होने को बेहद खास बताया।

जानिए क्यों इफको को मिला है दुनिया में पहला स्थान

WCM रिपोर्ट के अनुसार, इफको को दुनिया की नंबर 1 सहकारी संस्था घोषित किया गया है। इसका कारण है –

  • व्यापक सदस्यता
  • जीडीपी में योगदान
  • और सहकारी मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता।

अब क्या होगा आगे?

  • इस विश्वविद्यालय से निकले छात्र देश-विदेश में सहकारी मॉडल को आगे ले जाएंगे।
  • सहकारी विपणन में स्पेशलाइज्ड कोर्सेज ग्रामीण उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में पहचान दिलाएंगे।
  • डिजिटल और तकनीकी साक्षरता के जरिए सहकारिता को आधुनिक बनाया जाएगा।

निष्कर्ष

त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं बल्कि भारत की सहकारी आत्मा को नया आयाम देने वाला संस्थान होगा। इससे जुड़े कदम भारत को ग्राम से ग्लोबल की यात्रा में नई दिशा देंगे।

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