जेलर 2 रिव्यू (Jailer 2 Review)स्टार कास्ट: रजनीकांत, विद्या बालन, एसजे सूर्या, मिथुन चक्रवर्ती, रम्या कृष्णन, सूरज वेंजारामूडु
डायरेक्टर: नेल्सन दिलीपकुमार
रेटिंग: 3/5 स्टार्स
एक वक्त था जब रजनीकांत को उनकी एक्टिंग के लिए जाना जाता था, लेकिन आज का दौर अलग है. आज वो एक ऐसे 'सुपरस्टार' हैं जिनका सिगार पीने का अंदाज, चश्मा घुमाने का स्टाइल और स्लो-मोशन में चलना ही दर्शकों के लिए काफी होता है. डायरेक्टर नेल्सन दिलीपकुमार ने इसी 'रजनीकांत स्वैग' का जमकर फायदा उठाया है. हालांकि 'जेलर 2' में टाइगर मुथुवेल पांडियन की कहानी थोड़ी आगे जरूर बढ़ती है, लेकिन सच कहें तो हर कोई जानता है कि दर्शक थियेटर में कोई गहरी कहानी नहीं, बल्कि सिर्फ थलाइवा का भौकाल देखने जा रहे हैं.
क्या है 'जेलर 2' की कहानी?
यह फिल्म पहले पार्ट के 3 महीने बाद की कहानी दिखाती है. मुथु (रजनीकांत) ने विलेन वर्मन को मार दिया था. मुथु की फैमिली को आज भी नहीं पता कि उसने परिवार की सुरक्षा के लिए अपने ही विलेन बेटे अर्जुन की जान ले ली थी. अब मुथु सब कुछ भूलकर एक सुपरमार्केट में सुपरवाइजर का काम कर रहा है और एक आम जिंदगी जीने की कोशिश में है. लेकिन तभी मूर्ति तस्करों के रैकेट का नया सरगना दिलीप (सूरज वेंजारामूडु) मुथु की तलाश में आ धमकता है. इसके बाद मुथु को नए और पुराने दोस्तों के साथ मिलकर फिर से मैदान में उतरना पड़ता है.
कैसी है फिल्म? (रिव्यू)
डायरेक्टर नेल्सन ने रजनीकांत के फैंस को ध्यान में रखकर इसे एक परफेक्ट मसाला और कॉमेडी एंटरटेनर बनाया है. फिल्म में सितारों की भरमार है, लेकिन पूरी लाइमलाइट सिर्फ रजनीकांत लूट ले जाते हैं. बाकी सितारे बस मुथु के किरदार को और बड़ा दिखाने के लिए हैं. जब योगी बाबू और नमो नारायण कॉमेडी करते हैं और मुथु सीरियस चेहरा बनाए रहते हैं, तो दर्शकों को खूब मजा आता है. करीब तीन घंटे की यह फिल्म पूरी तरह से रजनीकांत के 'ऑरा' पर टिकी है.
कहाँ खा गई मात? (कमियां)
अगर आप रजनीकांत के कट्टर फैन नहीं हैं, तो यह फिल्म आपको थोड़ी बोर कर सकती है. फिल्म की कहानी जहां से शुरू होती है, वहीं के आस-पास घूमती रहती है. सबसे ज्यादा निराशा महिलाओं के किरदारों से होती है. विद्या बालन (कांता कल्पक) जैसी शानदार एक्ट्रेस का रोल भी ऐसा है जो एक समय बाद असहज लगने लगता है, क्योंकि उन्हें सिर्फ मुथु की तारीफें करते हुए दिखाया गया है. रजनीकांत का हीरोइज्म दिखाने के लिए एक प्रेग्नेंट महिला वाला सीन बेवजह डाला गया है. इसके अलावा, नोरा फतेही और पूर्णा के दो आइटम सॉन्ग (आला बोलेलो और बिंदास) फिल्म को बिना बात के लंबा करते हैं.
आखिरी फैसला
नेल्सन और रजनीकांत ने मिलकर एक ऐसी फिल्म बनाई है जो टाइमपास के लिए अच्छी है. हालांकि, इस बार के सरप्राइज कैमियो पहले पार्ट (शिवा राजकुमार, मोहनलाल, जैकी श्रॉफ) जैसा इम्पैक्ट नहीं छोड़ पाते. फिर भी, 75 साल की उम्र में रजनीकांत स्क्रीन पर जो जादू चलाते हैं, वो आजकल के युवा एक्टर्स भी नहीं कर पाते. रजनी फैंस के लिए टिकट के पैसे वसूल हैं!







