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विज़न से स्केल तक: श्री जयन्त चौधरी ने ओएफ़ए समिट 2026 केप टाउन में भारत के परिणाम-आधारित दृष्टिकोण को किया उजागर

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krishna kant

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विज़न से स्केल तक: श्री जयन्त चौधरी ने ओएफ़ए समिट 2026 केप टाउन में भारत के परिणाम-आधारित दृष्टिकोण को किया उजागर

केप टाउन / नई दिल्ली: भारत सरकार के माननीय कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री माननीय श्री जयन्त चौधरी, ने 25 से 27 मार्च 2026 को केप टाउन, साउथ अफ्रीका में हुए आउटकम्स फाइनेंस अलायंस (ओएफ़ए) समिट 2026 में हिस्सा लिया। यहाँ उन्होंने स्किल्स और ह्यूमन डेवलपमेंट में इनोवेटिव फाइनेंसिंग मैकेनिज्म, ग्लोबल पार्टनरशिप और आउटकम-ड्रिवन इन्वेस्टमेंट के लिए भारत की प्रतिबद्धिता पर ज़ोर दिया।

आउटकम्स फाइनेंस अलायंस समिट एक प्रमुक ग्लोबल प्लेटफॉर्म है जो डेवलपमेंट फाइनेंस में आउटकम्स-बेस्ड अप्रोच की भूमिका को आगे बढ़ाने के लिए सरकारों, फिलैंथ्रोपी, इन्वेस्टर्स, मल्टीलेटरल्स, इंटरमीडियरीज़ और डिलीवरी पार्टनर्स को एकजुट करता है।

इस समिट में, माननीय श्री जयन्त चौधरी “आउटकम के लिए पब्लिक-प्राइवेट फंडिंग को अनलॉक करना” विषय पर एक हाई-लेवल ओपनिंग प्लेनरी पैनल में शामिल हुए। इस पैनल में उनके साथ साउथ अफ्रीका सरकार, रैंड मर्चेंट बैंक (आरएमबी), और स्विट्जरलैंड के स्टेट सेक्रेटेरिएट फॉर इकोनॉमिक अफेयर्स (एसईसीओ) के लीडर भी शामिल थे। इस चर्चा में स्किलिंग, एजुकेशन और आजीविका में मापे जा सकने वाले नतीजों के आसपास पब्लिक, प्राइवेट और फिलैंथ्रोपिक कैपिटल को एकजुट करने पर विशेष जोर देते हुए आउटकम-बेस्ड अप्रोच को आगे बढ़ाने में भारत की बढ़ती नेतृत्व भूमिका को उजागर किया गया।

समिट में बोलते हुए, माननीय श्री जयन्त चौधरी ने कहा, “जैसे-जैसे दुनिया तेज़ी से टेक्नोलॉजिकल और डेमोग्राफिक बदलावों से गुज़र रही है, असली चुनौती सिर्फ़ फाइनेंस जुटाना ही नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि इन्वेस्टमेंट लोगों के लिए ऐसे नतीजों में बदले जिन्हें मापा जा सके। भारत का अनुभव दिखाता है कि जब सरकारें, इंडस्ट्री और डेवलपमेंट पार्टनर परिणामों के आधार पर एकजुट होते हैं, चाहे वह स्किलिंग, एजुकेशन या आजीविका में हो, तब हम ऐसे विस्तार योग्य (स्केलेबल) समाधान विकसित कर सकते हैं, जो युवाओं को सशक्त बनाते हैं और आर्थिक स्थिरता को मजबूत करते हैं।”

इसके अलावा, माननीय मंत्री ने अफ्रीका के सीनियर सरकारी और संस्थाओं के प्रतिनिधियों से बात की, और भारत-अफ्रीका पार्टनरशिप की मजबूती और साझा विकास प्राथमिकताओं को पूरा करने में क्रॉस-कंट्री लर्निंग की अहमियत को दोहराया। उन्होंने साउथ अफ्रीका के लीडरों के साथ सार्थक चर्चा की, जिनमें प्रेसीडेंसी में डिप्टी मिनिस्टर माननीय नॉनसेबा म्हलौली, हायर एजुकेशन और ट्रेनिंग के डिप्टी मिनिस्टर डॉ. मिम्मी गोंडवे, और नेशनल स्किल्स फंड (एनएसएफ़), साउथ अफ्रीका की एक्टिंग चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर सुश्री मेलिसा एरा, साथ ही नाइजीरिया के लागोस स्टेट यूनिवर्सल बेसिक एजुकेशन बोर्ड (लागोस एसयूबीईबी) की परमानेंट बोर्ड मेंबर सुश्री शिजुआडे इडोवु-तियामियू शामिल थे। चर्चा फ्यूचर-रेडी वर्कफोर्स डेवलपमेंट और कॉमन डेवलपमेंट चैलेंजेज़ को पूरा करने में आउटकम-बेस्ड फाइनेंसिंग (ओबीएफ़) की भूमिका के आसपास साझा प्राथमिकताओं पर केन्द्रित थी। भारत और दक्षिण अफ्रीका ने स्किलिंग और रोज़गार सिस्टम में ओबीएफ़ को लागू करने के अपने-अपने अनुभवों से मिली जानकारी का भी आदान-प्रदान किया जिसमें दक्षिण अफ्रीका की जॉब्स बूस्ट पहल, और भारत के स्किल इम्पैक्ट बॉन्ड और आने वाले स्किल्स आउटकम फंड ने स्केलिंग और इंस्टीट्यूशनलाइज़ेशन में सरकार की भूमिका पर महत्वपूर्ण सीखें सामने आईं।

इसके अलावा,माननीय श्री जयन्त चौधरी ने नतीजों पर आधारित फाइनेंसिंग और डेवलपमेंट इनोवेशन पर सहयोग को गहरा करने के लिए स्ट्रेटेजिक इंटरनेशनल पार्टनर्स और इंस्टीट्यूशन्स के साथ कई सार्थक बैठकें कीं। इनमें फॉरेन, कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस (एफ़सीडीओ), यूके सरकार, ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी), स्टेट सेक्रेटेरिएट फॉर इकोनॉमिक अफेयर्स (एसईसीओ), स्विट्जरलैंड, और ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट और चिल्ड्रन्स इन्वेस्टमेंट फंड फाउंडेशन जैसे फिलेन्थ्रोपिक इंस्टीट्यूशन्स के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा शामिल थी।

इन मुलाकातों में श्री जयन्त चौधरी ने इनोवेटिव फाइनेंसिंग, स्किल्स फाइनेंसिंग, प्राइवेट सेक्टर से जुड़ाव और पार्टनरशिप वाले तरीकों से समाज पर असर डालने के लिए अपनी साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा की। बातचीत से यूनाइटेड किंगडम के बेटर फ्यूचर्स फंड समेत अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से मिली सीखों का आदान-प्रदान भी हुआ और स्किल्स और रोज़गार के नतीजों के लिए लगातार सहयोग के अवसरों का पता लगाया गया।

ओएफ़ए समिट में भारत की भागीदारी ने बड़े पैमाने पर, सबको साथ लेकर चलने वाले स्किलिंग इकोसिस्टम और नतीजे पर आधारित डेवलपमेंट फ्रेमवर्क बनाने में देश की बढ़ती नेतृत्व भूमिका को उजागर किया जो युवाओं को मज़बूत बनाने और ह्यूमन कैपिटल डेवलपमेंट के लिए ग्लोबल पार्टनरशिप को मज़बूत करने के उसके विज़न के अनुरूप है।

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